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ईरान पर अमेरिकी हमले से मचा हड़कंप, होर्मुज पर बढ़ा युद्ध का खतरा; जानिए इस पूरे घटनाक्रम की 10 बड़ी बातें
 

 


मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव मंगलवार को उस समय और गहरा गया, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए। बंदर अब्बास और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क़ेश्म द्वीप के आसपास हुए धमाकों के बाद क्षेत्र में व्यापक सैन्य संघर्ष की आशंका और बढ़ गई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव को लेकर पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले को पूरी तरह जायज बताते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो उसे बेहद गंभीर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

क्या हुआ? जानिए 10 बड़ी बातें
1. बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के पास धमाके

ईरानी सरकारी टेलीविजन और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गन प्रांत में स्थित प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्से और क़ेश्म द्वीप के आसपास कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों में तत्काल बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई।

2. US CENTCOM ने हमले की पुष्टि की

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी IRGC से जुड़े ठिकानों के खिलाफ सटीक सैन्य हमले किए। अमेरिका के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्य बलों के खिलाफ कथित ईरानी हमलों के जवाब में की गई।

3. ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो अमेरिका की ओर से बेहद बड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप ने ईरानी शासन की सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठाए और संकेत दिया कि अमेरिकी कार्रवाई का सबसे बड़ा चरण अभी बाकी हो सकता है।

4. ईरानी शासन की क्षमता पर ट्रंप का हमला

ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति को बेहद कमजोर बताते हुए दावा किया कि देश की नौसेना, वायुसेना और अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में हैं। उन्होंने ईरानी सरकार की प्रशासनिक और सैन्य क्षमता पर भी तीखी टिप्पणी की।

5. अमेरिका ने अपनाई सीमित हमले की रणनीति

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य रडार और मिसाइल प्रणालियों को कमजोर करना बताया गया, ताकि व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर खतरा कम किया जा सके।

6. लराक द्वीप पर पहले भी हुई थी अमेरिकी कार्रवाई

यह हमला रविवार को हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। रविवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लराक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चिंग क्षमता को निशाना बनाया था।

अमेरिका का कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान को महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकना था।

7. ईरान ने भी किया जवाबी हमला

रविवार की कार्रवाई के बाद ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से दावा किया गया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया।

8. होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट

पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव से तेल की वैश्विक आपूर्ति, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच यहां बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ रही है।

9. अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिरोध

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरानी नेतृत्व पर्दे के पीछे बातचीत और समझौते की संभावनाएं तलाशता रहा है, लेकिन निर्णायक कदम उठाने में बार-बार देरी हुई। वॉशिंगटन का आरोप है कि तेहरान की सैन्य गतिविधियों को रोकने में विफलता ने अमेरिका को सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर किया।

हालांकि, ईरान की ओर से इन अमेरिकी दावों और हमलों को लेकर अलग रुख सामने आता रहा है।

10. राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने युद्धविराम का संकेत दिया

तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया। किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका जून में तय हुए युद्धविराम समझौते/MOU की शर्तों का ईमानदारी से पालन करता है, तो ईरान भी अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं पर लौटने के लिए तैयार है।

अब आगे क्या?

अमेरिकी हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी। अगर तेहरान अमेरिकी ठिकानों, सैन्य बलों या होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हितों को निशाना बनाता है, तो दोनों देशों के बीच संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

दूसरी ओर, अगर कूटनीतिक प्रयास दोबारा सक्रिय होते हैं और युद्धविराम की शर्तों पर सहमति बनती है, तो मौजूदा तनाव को सीमित करने की संभावना भी बनी हुई है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान की अगली सैन्य प्रतिक्रिया और ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर है। आने वाले कुछ दिन यह तय कर सकते हैं कि यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या मध्य पूर्व एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता है।