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अमेरिका-ईरान के बीच बड़ी कूटनीतिक पहल, वीडियो में जाने होर्मुज स्ट्रेट से तनाव कम करने पर बनी सहमति

 

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को धीरे-धीरे समाप्त करने और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकाबंदी हटाने को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनती दिखाई दे रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्ष एक प्रारंभिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, हालांकि अभी कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।

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CBS न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने जानकारी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिकारी के अनुसार, दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति बनाई है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में शामिल है और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि अभी तक इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। अमेरिकी अधिकारी ने साफ किया कि यह केवल सैद्धांतिक सहमति है और अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते को लागू करने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की स्वीकृति जरूरी होगी। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कुछ दिन और लग सकते हैं।

दूसरी तरफ ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान ईरानी अधिकारियों के बयानों में भी अलग-अलग संकेत देखने को मिले हैं। कुछ अधिकारियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, जबकि कुछ ने अभी किसी अंतिम समझौते से इनकार किया है। इससे यह साफ है कि पर्दे के पीछे बातचीत जारी है लेकिन दोनों देश अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे तनाव में कमी आएगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक तेल बाजार को भी राहत मिलने की उम्मीद है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की सप्लाई होती है और यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए एक बड़ा कूटनीतिक कदम साबित हो सकता है। हालांकि अभी कई जटिल मुद्दों पर बातचीत बाकी है, लेकिन शुरुआती सहमति को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में यह समझौता आधिकारिक रूप ले पाएगा या फिर बातचीत किसी नए मोड़ पर पहुंच जाएगी।