ईरान पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, 90 सैन्य ठिकाने बनाए निशाना, वीडियो में ट्रम्प बोले- 'मैं ईरान की हिटलिस्ट में सबसे ऊपर'
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार रात ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट, निगरानी केंद्र, नौसैनिक ठिकाने तथा सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अमेरिका का दावा है कि इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल वह होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के लिए कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है और यहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकता है।
वहीं, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक अमेरिकी हमले में खुजेस्तान प्रांत के अहवाज शहर के बाहरी इलाके को भी निशाना बनाया गया। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि राहत और बचाव दल मौके पर तैनात हैं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें हर समय खतरा बना रहता है और वह "ईरान की हिटलिस्ट में सबसे ऊपर" हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान बातचीत और समझौता चाहता है, लेकिन उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं है कि तेहरान किसी भी समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।
ट्रम्प के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में और अधिक तल्खी आने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी प्रशासन लगातार यह कहता रहा है कि ईरान की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने ईरान के सैन्य ढांचे को कमजोर करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश की संप्रभुता पर किसी भी हमले का उचित और सख्त जवाब दिया जाएगा। हालांकि, अभी तक ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसकी जवाबी कार्रवाई कब और किस रूप में होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्र में बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है।