491 दिन तक युद्ध के मोर्चे पर फंसा रहा यूक्रेनी सैनिक, वीडियो में जाने पहली बार भारी ड्रोन से हुआ रेस्क्यू; दोनों पैर गंवाने के बाद बची जान
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया है, जिसने आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका को नई दिशा दी है। यूक्रेन के सैनिक कोस्त्यांतिन व्लासेंको 491 दिनों तक अग्रिम मोर्चे पर फंसे रहे। बारूदी सुरंगों, रूसी सैनिकों और लगातार मंडराते ड्रोन के कारण उन्हें जमीन के रास्ते निकालना बेहद मुश्किल था। आखिरकार, यूक्रेनी सेना ने भारी क्षमता वाले ड्रोन की मदद से उन्हें सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया। यूक्रेनी सैन्य इकाइयों ने इसे युद्धक्षेत्र से घायल सैनिक को हवाई ड्रोन के जरिए निकालने की अपनी तरह की पहली कार्रवाई बताया है।
कुपियांस्क मोर्चे पर 491 दिनों तक फंसे रहे व्लासेंको
कोस्त्यांतिन व्लासेंको यूक्रेन की 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड में तैनात थे। 2 जून 2025 को वह अपने एक साथी के साथ पूर्वी यूक्रेन के कुपियांस्क क्षेत्र में ओस्किल नदी के बाएं किनारे स्थित मोर्चे पर पहुंचे थे। यह इलाका रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का संवेदनशील क्षेत्र है।
दोनों सैनिकों ने कंक्रीट के एक बड़े नाली पाइप के भीतर अपना ठिकाना बनाया था। यहां से वे अपनी सैन्य जिम्मेदारी निभा रहे थे। हालांकि, लगातार रूसी हमलों और निगरानी ड्रोन की मौजूदगी के कारण उनकी स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी।शुरुआत में सैनिकों को कुछ समय बाद दूसरी टुकड़ी से बदला जाना था, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए। आसपास बारूदी सुरंगें बिछी थीं और किसी भी गतिविधि पर रूसी ड्रोन की नजर पड़ने का खतरा था। ऐसे में व्लासेंको को निकालने की कोशिश करना भी दूसरे सैनिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
ड्रोन हमले में घायल हुए, साथी की भी मौत
14 फरवरी 2026 को रूसी ड्रोन से किए गए हमले में व्लासेंको के दोनों पैर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी संघर्ष के दौरान उनके साथी की मौत हो गई। व्लासेंको की चोटें इतनी गंभीर थीं कि उनके लिए सामान्य तरीके से चलना या खुद को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना संभव नहीं रह गया था।समय बीतने के साथ उनके पैरों की हालत और खराब होती गई। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें अंततः अपने पैरों के हिस्से काटने पड़े। गंभीर चोटों के बावजूद वह लंबे समय तक उसी क्षेत्र में जीवित रहे।इस दौरान यूक्रेनी सैनिक ड्रोन के माध्यम से उन्हें भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाते रहे। इसके बावजूद उन्हें वहां से निकालना बड़ी चुनौती बना रहा, क्योंकि जमीन पर बचाव दल भेजने से और सैनिकों के हताहत होने का खतरा था।
छह महीने की तैयारी के बाद बनाया गया रेस्क्यू प्लान
व्लासेंको को बचाने के लिए यूक्रेन की 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड और 92वीं अलग असॉल्ट ब्रिगेड के सैनिकों ने मिलकर योजना तैयार की। इस अभियान में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य सैन्य इकाइयों की भी मदद ली गई।इसके लिए भारी क्षमता वाले हेक्साकॉप्टर ड्रोन को विशेष उपकरणों से लैस किया गया। इसमें ऐसी व्यवस्था तैयार की गई, जिससे घायल सैनिक को हवा में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके।
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सैनिक को ड्रोन के साथ सुरक्षित तरीके से जोड़ना था। व्लासेंको को विशेष हार्नेस और उपकरणों का इस्तेमाल करके खुद को ड्रोन की उठाने वाली प्रणाली से जोड़ना था। इसके लिए उन्हें पहले से जरूरी उपकरण और वीडियो निर्देश भी भेजे गए थे।अभियान की योजना में ड्रोन की सुरक्षा, संभावित तकनीकी खराबी और आपात स्थिति में वैकल्पिक बचाव व्यवस्था जैसे पहलुओं को शामिल किया गया। करीब 15 सैन्यकर्मियों ने इसकी तैयारी और योजना में हिस्सा लिया।
हवा में उठाकर सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया
रेस्क्यू अभियान के दौरान भारी ड्रोन व्लासेंको की स्थिति तक पहुंचा। उन्होंने विशेष उपकरण की मदद से खुद को ड्रोन से जोड़ा और इसके बाद उन्हें हवा में उठाकर वहां से निकाला गया।आगे की यात्रा में उन्हें एक सुरक्षित मध्यवर्ती स्थान पर उतारा गया। वहां से मानवरहित जमीनी वाहन की मदद से उन्हें लगभग आठ किलोमीटर दूर दूसरे स्थान तक पहुंचाया गया। इसके बाद बचाव दल उन्हें वाहन से चिकित्सा सहायता केंद्र ले गया, जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया।यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, व्लासेंको की जान अब खतरे से बाहर है और वह इलाज तथा पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
युद्ध में ड्रोन की बदलती भूमिका
यह अभियान दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन केवल निगरानी या हमले के लिए ही नहीं, बल्कि घायल सैनिकों को बचाने के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जिन इलाकों में बारूदी सुरंगों और दुश्मन की निगरानी के कारण पारंपरिक बचाव अभियान बेहद जोखिम भरे हो जाते हैं, वहां ऐसी तकनीक विकल्प प्रदान कर सकती है।हालांकि, हवा में घायल व्यक्ति को ले जाना भी जोखिम से खाली नहीं है। इसके लिए विशेष उपकरण, प्रशिक्षित ऑपरेटर और विस्तृत योजना की जरूरत होती है।व्लासेंको का रेस्क्यू यूक्रेनी सेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। 491 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने और गंभीर चोटों के बावजूद बचाए जाने की उनकी कहानी युद्धक्षेत्र में तकनीक, सैन्य समन्वय और मानवीय प्रयासों की अहमियत को सामने लाती है।