यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस को बड़ा झटका, वीडियो में जाने एजोव सागर में रोकी जहाजों की आवाजाही; व्यापार पर बढ़ा असर
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में ड्रोन हमलों ने एक नया मोड़ ला दिया है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस को रणनीतिक रूप से बेहद अहम एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी है। इससे रूस के समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क पर असर पड़ने लगा है।
अजोव सागर लंबे समय तक रूस के नियंत्रण वाले सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों में शामिल रहा था। रूस इस रास्ते का इस्तेमाल न सिर्फ सैन्य गतिविधियों के लिए करता था, बल्कि दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, स्टील, सूरजमुखी तेल और अन्य महत्वपूर्ण सामानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी करता था। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेन के ड्रोन हमले अधिक प्रभावी हुए हैं, जिससे इस समुद्री मार्ग पर रूस की पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है।
एजोव सागर में बढ़ा ड्रोन हमलों का खतरा
यूक्रेन की ड्रोन रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले यूक्रेनी हमले मुख्य रूप से रूस के शैडो ऑयल टैंकरों और सैन्य जहाजों तक सीमित थे, लेकिन अब इनका दायरा बढ़ गया है। यूक्रेन अब रूस के समुद्री बुनियादी ढांचे और व्यापारिक गतिविधियों को भी निशाना बना रहा है।
यूक्रेन की ड्रोन सेना के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने बुधवार को दावा किया कि पिछले नौ दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रूस के व्यापार पर पड़ने लगा असर
अजोव सागर रूस के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद, ऊर्जा संसाधन और औद्योगिक सामानों का परिवहन होता है। जहाजों की आवाजाही रुकने से रूस के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर रूस के अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और राजस्व पर पड़ सकता है। खासकर तेल और कृषि उत्पादों के निर्यात में देरी वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित कर सकती है।
यूक्रेन की नई युद्ध रणनीति
युद्ध के शुरुआती दौर में रूस को समुद्री क्षेत्र में बढ़त हासिल थी, लेकिन यूक्रेन ने कम लागत वाले ड्रोन और आधुनिक तकनीक के जरिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। छोटे लेकिन प्रभावी ड्रोन हमलों के जरिए यूक्रेन रूस के सैन्य और आर्थिक ढांचे को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेन की कोशिश है कि रूस की समुद्री क्षमता को कमजोर किया जाए और उसकी युद्ध संचालन क्षमता पर दबाव बनाया जाए। वहीं, रूस भी इन हमलों से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा हुआ है।
आगे बढ़ सकता है संघर्ष
अजोव सागर में बढ़ती गतिविधियों ने रूस-यूक्रेन युद्ध को एक नए मोर्चे पर ला खड़ा किया है। यदि ड्रोन हमले इसी तरह जारी रहते हैं, तो समुद्री व्यापार और सैन्य आपूर्ति दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। एजोव सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।