☰
×

ट्रम्प की नीतियां पड़ीं भारी: मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार, अब अपनी ही पार्टी के नेताओं ने खोला मोर्चा

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनकी रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है और डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रम्प की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि अब विरोधियों के साथ-साथ उनकी अपनी पार्टी के नेता और समर्थक भी खुलकर आलोचना कर रहे हैं।रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ जारी युद्ध और बढ़ती महंगाई ने आम अमेरिकी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। इसका सीधा असर चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर दिखाई दिया। अब पार्टी के भीतर से ट्रम्प पर अपनी रणनीति बदलने और व्हाइट हाउस की टीम में बड़े बदलाव करने का दबाव बढ़ रहा है।

टैरिफ और महंगाई बनी चुनावी हार की बड़ी वजह

ट्रम्प प्रशासन की ओर से दूसरे देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए टैरिफ का असर अमेरिकी बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ा है। आयात महंगा होने से कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की चिंता सामने आई। इसके अलावा व्यापारिक नीतियों को लेकर कारोबारियों और किसानों के बीच भी असंतोष देखने को मिला।चुनाव के दौरान महंगाई और रोजमर्रा के खर्च का मुद्दा मतदाताओं के लिए बेहद अहम रहा। कई मतदाताओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों को बढ़ती कीमतों के लिए जिम्मेदार माना। ऐसे में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।

ईरान युद्ध ने बढ़ाई ट्रम्प की मुश्किलें

रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान के साथ जारी युद्ध को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। इस संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा और पेट्रोल-ईंधन की कीमतों को लेकर अमेरिकी नागरिकों की चिंता बढ़ी। युद्ध पर सरकारी खर्च और अमेरिकी विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठे।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चुनावी हार के बाद ईरान युद्ध को पार्टी की हार की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह मानता है कि इस युद्ध के कारण सीनेट में बहुमत गंवाना सही फैसला था, तो उसे अपनी बात रखनी चाहिए। वेंस की टिप्पणी को ट्रम्प की रणनीति से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रम्प से मांगा बदलाव

चुनावी नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के कई रणनीतिकारों और नेताओं ने ट्रम्प को अपनी नीतियों पर दोबारा विचार करने की सलाह दी है। पार्टी के भीतर से व्हाइट हाउस की टीम में बदलाव, प्रशासन में अनुशासन और विवादित फैसलों की समीक्षा की मांग उठ रही है।रिपब्लिकन रणनीतिकार जॉन फीहेरी ने चुनावी नतीजों को ट्रम्प के लिए बड़ी राजनीतिक आपदा बताया। उनका कहना है कि राष्ट्रपति को अपनी टीम में बदलाव करना चाहिए और आगे की रणनीति पर नए सिरे से काम करना चाहिए।कुछ रिपब्लिकन नेताओं को यह भी डर है कि यदि ट्रम्प इसी तरह अपनी मौजूदा नीतियों पर आगे बढ़ते रहे, तो 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को और बड़ा नुकसान हो सकता है।

डेमोक्रेट्स को मिली बड़ी ताकत, ट्रम्प के सामने नई चुनौती

डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने से ट्रम्प प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब डेमोक्रेट्स सरकार के विधेयकों को रोकने, प्रशासन के फैसलों की जांच कराने और राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के नामों को चुनौती देने की स्थिति में होंगे।इसका मतलब है कि ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को संसद के जरिए आगे बढ़ाना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है। प्रशासन को आने वाले समय में कई अहम मुद्दों पर विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

क्या ट्रम्प बदलेंगे अपनी रणनीति?

चुनावी हार के बावजूद ट्रम्प ने फिलहाल अपनी नीतियों से पीछे हटने के स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई करना सही फैसला था और वह दोबारा भी ऐसा ही करते। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान युद्ध का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर पड़ा।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रम्प अपनी पार्टी के नेताओं की सलाह मानकर टैरिफ और ईरान नीति में बदलाव करेंगे या फिर पहले की तरह अपने फैसलों पर कायम रहेंगे।

फिलहाल इतना साफ है कि मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रम्प को अब सिर्फ डेमोक्रेटिक पार्टी ही नहीं, बल्कि अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से भी बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस में संभावित बदलाव और ईरान युद्ध को लेकर लिए जाने वाले फैसले अमेरिकी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।