ट्रम्प का बड़ा फैसला: रूस से डीजल खरीद पर लगी रोक हटाई, वीडियो में जाने भारत-चीन पर 100% टैरिफ की चेतावनी के बीच बदला रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने को लेकर प्रतिबंधों में राहत देने का ऐलान किया है। उनके मुताबिक, रूसी डीजल की आपूर्ति बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनाव बना हुआ है।रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। ऊर्जा क्षेत्र भी इन प्रतिबंधों के दायरे में रहा। अब रूसी डीजल की खरीद को लेकर राहत देने के ट्रम्प के ऐलान ने अमेरिकी ऊर्जा नीति और रूस के साथ उसके संबंधों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
डीजल की सप्लाई बढ़ाने का दावा
ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों में ईंधन की उपलब्धता बढ़ सकती है। उनका तर्क है कि सप्लाई बढ़ने से कीमतों को नीचे लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कीमतों पर वास्तविक असर मांग, परिवहन लागत, रिफाइनरी क्षमता और दूसरे देशों की ऊर्जा नीतियों पर भी निर्भर करेगा।ट्रम्प के बयान के मुताबिक, रूस से शुरुआती चरण में तीन लाख टन से अधिक डीजल भेजे जाने की बात कही गई है। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और फिर दस लाख टन की आपूर्ति का उल्लेख किया गया। आगे चलकर तीस लाख टन तक डीजल भेजे जाने की संभावना भी बताई गई है। इन आंकड़ों और आपूर्ति की समयसीमा की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
7 अप्रैल 2027 तक मिली अस्थायी छूट
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने 9 अक्टूबर को एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया। इसके तहत रूसी मूल के डीजल की बिक्री, डिलीवरी और आयात से जुड़े लेनदेन को 7 अप्रैल 2027 तक अनुमति दी गई है। यह छूट रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत का संकेत है। हालांकि, लाइसेंस की शर्तें लागू रहेंगी और रूस से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन पर सामान्य छूट नहीं दी गई है।
भारत और चीन पर टैरिफ की चेतावनी के बीच फैसला
ट्रम्प का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि सितंबर में उन्होंने ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार भी इसके दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, कानून के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार मिलना और सभी संबंधित देशों पर स्वतः टैरिफ लागू हो जाना अलग-अलग बातें हैं।
रूस से डीजल खरीदने की अनुमति देकर ट्रम्प प्रशासन ने फिलहाल ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। लेकिन इस फैसले से वैश्विक बाजार में कीमतें कितनी घटेंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त आपूर्ति का असर सीमित रह सकता है, क्योंकि डीजल की कीमतें रिफाइनरी क्षमता, वैश्विक मांग और दूसरे क्षेत्रों में जारी संघर्षों से भी प्रभावित होती हैं।
इस फैसले से रूस को अपने डीजल की बिक्री के लिए बड़ा बाजार मिल सकता है, जबकि अमेरिका को ईंधन की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी ओर, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच प्रतिबंधों में दी गई यह राहत अमेरिकी नीति को लेकर सवाल खड़े कर सकती है। आने वाले महीनों में वास्तविक आपूर्ति और बाजार की प्रतिक्रिया से पता चलेगा कि इस कदम का ऊर्जा कीमतों और रूस-अमेरिका संबंधों पर कितना असर पड़ता है।