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Trump ने इजराइलियों से की नेतन्याहू को फिर PM बनाने की अपील, बोले- दूसरा नेता चुना तो ईरान से खुद लड़ना पड़ेगा

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा सत्ता सौंपने की अपील की है। ट्रम्प ने नेतन्याहू की तारीफ करते हुए उन्हें मजबूत और बहादुर नेता बताया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर इजराइल ने किसी दूसरे नेता को चुना, तो ईरान के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका को अकेले आगे आना पड़ सकता है।

ट्रम्प ने नेतन्याहू को बताया भरोसेमंद नेता

इजराइल के लोगों के नाम जारी संदेश में ट्रम्प ने नेतन्याहू को ‘मजबूत, बहादुर और शानदार’ नेता बताया। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू इजराइल के लोगों को कभी निराश नहीं करेंगे।

ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने नेतन्याहू को बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम करते देखा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे दबाव में कई लोग कमजोर पड़ जाते, लेकिन नेतन्याहू मजबूती से डटे रहे। ट्रम्प ने यह भी कहा कि इजराइल के भीतर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा है।

ईरान को लेकर ट्रम्प ने दी चेतावनी

ट्रम्प ने ईरान पर पिछले 51 साल से अमेरिका और इजराइल के खिलाफ धमकियां देने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान के नारों का जिक्र करते हुए कहा कि इन बयानों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने जल्द अपना रवैया नहीं बदला, तो अमेरिका बाकी कार्रवाई भी पूरी कर सकता है। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि वह नहीं चाहते कि ईरान के खिलाफ लड़ाई की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका को अकेले उठानी पड़े।

चुनावी सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पिछड़ी

इजराइल में 27 अक्टूबर को प्रस्तावित चुनाव से पहले सामने आए चार सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी, गैडी आइजनकोट की याशर पार्टी से पीछे दिखाई गई है।

सर्वे के औसत के मुताबिक, याशर पार्टी को 21.5 सीटें और लिकुड को 19 सीटें मिलने का अनुमान है। अलग-अलग सर्वे में भी दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा नजर आ रहा है।

चैनल 12 के सर्वे में याशर को 23 और लिकुड को 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, अन्य सर्वे में भी याशर पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई गई है।

हालांकि, किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नजर नहीं आ रही हैं। अनुमानों के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 49 से 53 सीटें और आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को 50 से 54 सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में अरब पार्टियों की भूमिका सरकार गठन में अहम हो सकती है।

ट्रम्प और नेतन्याहू के रिश्तों ने बदली मिडिल ईस्ट की राजनीति

ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच करीबी संबंध लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। दोनों नेताओं के कार्यकाल में अमेरिका ने इजराइल के समर्थन में कई अहम फैसले किए।

1. यरुशलम को इजराइल की राजधानी की मान्यता: 2017 में ट्रम्प प्रशासन ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने का ऐलान किया। इसके बाद अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित किया गया।

2. गोलान हाइट्स पर इजराइल के दावे का समर्थन: 2019 में अमेरिका ने गोलान हाइट्स पर इजराइल की संप्रभुता को मान्यता दी। इस क्षेत्र पर इजराइल के नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बना हुआ है।

3. अब्राहम समझौता: 2020 में अमेरिकी मध्यस्थता से इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के साथ संबंध सामान्य करने के समझौते किए। इसे क्षेत्रीय कूटनीति में एक बड़ा बदलाव माना गया।

4. ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका की वापसी: 2018 में ट्रम्प ने ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकालने का फैसला किया। इस कदम का नेतन्याहू ने समर्थन किया, हालांकि इससे ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ा।

5. गाजा युद्ध और इजराइल को समर्थन: गाजा युद्ध के दौरान इजराइल को अमेरिकी समर्थन दोनों देशों के रिश्तों का प्रमुख मुद्दा रहा। इस नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन और आलोचना, दोनों देखने को मिले।

चुनाव से पहले ट्रम्प का संदेश क्यों अहम?

नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की ट्रम्प की अपील ऐसे समय आई है, जब चुनावी सर्वे में उनकी पार्टी को चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। ईरान के मुद्दे को चुनावी बहस से जोड़कर ट्रम्प ने इजराइल की सुरक्षा और नेतृत्व के सवाल को प्रमुखता दी है।

हालांकि, चुनाव का वास्तविक परिणाम मतदाताओं के फैसले और सरकार बनाने के लिए होने वाले गठबंधन पर निर्भर करेगा। सर्वे केवल संभावित रुझान बताते हैं, अंतिम नतीजे नहीं।