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ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाला कानून फिलहाल रोका, वीडियो में जाने भारत समेत कई देशों को 100% टैरिफ से मिल सकती है राहत

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से संबंधित आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इससे भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान जैसे देशों पर असर पड़ने की आशंका थी। इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए मॉस्को को आर्थिक संसाधन जुटाने में मुश्किल हो।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता था 100% टैरिफ

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प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के आयात पर भारी टैरिफ लगाने का विकल्प रखता था। इसमें 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। इससे रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते थे।भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों पर इसका खास असर पड़ने की आशंका थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में रूस से तेल की खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध या अमेरिकी टैरिफ का खतरा भारत की ऊर्जा नीति और व्यापारिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।हालांकि, ट्रम्प द्वारा कानून को फिलहाल रोकने के फैसले के बाद इस प्रस्ताव के तत्काल प्रभावी होने की स्थिति टल गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में ऐसे प्रतिबंधों की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।

रूस की कमाई रोकने की थी योजना

इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली आय पर दबाव बनाना था। रूस की अर्थव्यवस्था में तेल और गैस के निर्यात की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के बीच पश्चिमी देशों ने रूस की आर्थिक क्षमता सीमित करने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का विचार भी इसी रणनीति का हिस्सा था। इसके जरिए उन देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती थी, जो रूसी तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं।लेकिन ऐसे कदमों का असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहता। वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति, कीमतों और व्यापारिक संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है ट्रम्प का फैसला?

भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने रूस से तेल खरीदने से जुड़े मुद्दे उठा चुका है। भारत के लिए ऊर्जा की नियमित आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय ऊर्जा आयात के विकल्पों में शामिल है।यदि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाता, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता था। इसके अलावा, भारत को वैकल्पिक देशों से तेल खरीदने की संभावनाओं पर विचार करना पड़ सकता था।फिलहाल कानून को रोकने के फैसले से इस प्रस्ताव के तत्काल प्रभाव का खतरा टलता दिखाई दे रहा है। हालांकि, भारत पर भविष्य में किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा या नहीं, यह अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों और कानून की स्थिति पर निर्भर करेगा।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ सकती थीं तेल की कीमतें

जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के बीच रूस से तेल की आपूर्ति कम करना वैश्विक बाजार के लिए चुनौती बन सकता है।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से तेल की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। यदि इसके साथ रूस से तेल की आपूर्ति भी घटती, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का जोखिम रहता।

ट्रम्प के फैसले पर आगे नजर

ट्रम्प का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका रूस पर दबाव बनाने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। प्रस्तावित प्रतिबंधों का असर भारत समेत कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आयात पर पड़ सकता था।फिलहाल कानून को रोकने से तत्काल टैरिफ का खतरा टला है, लेकिन आगे की नीति पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। भारत के लिए आने वाले समय में अमेरिकी फैसले, रूस से तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अहम रहेंगी।