अमेरिका-सऊदी परमाणु डील पर संकट, ट्रम्प ने रखी नई शर्त; वीडियो में जाने इजराइल से रिश्ते सामान्य करने का दबाव
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से लंबित परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार को हुई इस डील के महज 24 घंटे के भीतर ही इसके भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते को आगे बढ़ाने के लिए नई शर्त रख दी है। उन्होंने साफ कहा है कि सऊदी अरब को यह डील तभी मिलेगी, जब वह इजराइल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करेगा और अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा। ट्रम्प के इस बयान के बाद अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह डील दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत का विषय रही है और इसे ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।
ट्रम्प ने लगाई नई शर्त
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि सऊदी अरब को परमाणु सहयोग की अनुमति देने के साथ कुछ शर्तों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन यानी एनरिचमेंट की अनुमति नहीं दी जाएगी।ट्रम्प का कहना है कि परमाणु तकनीक इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होना चाहिए और इससे किसी भी तरह का सुरक्षा खतरा पैदा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की है।
वॉशिंगटन में हुआ था हस्ताक्षर समारोह
अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में हुए समझौते के हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी घोषणा को लेकर व्हाइट हाउस और ऊर्जा विभाग के बीच मतभेद की स्थिति पैदा हुई।बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद अमेरिकी मीडिया में हुई आलोचनाओं ने भी उनकी नाराजगी बढ़ा दी।
घोषणा टालने को कहा गया था
रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से इस समझौते की घोषणा को कुछ समय के लिए टालने को कहा था। इसके बावजूद विभाग ने न केवल हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया, बल्कि मीडिया के सामने इसकी जानकारी भी साझा कर दी।हालांकि, व्हाइट हाउस ने किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की शर्त शुरुआत से ही ट्रम्प प्रशासन की नीति का हिस्सा रही है।
ऊर्जा विभाग ने विवाद से किया इनकार
वहीं अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने भी किसी तरह के टकराव या मतभेद की खबरों को खारिज किया है। विभाग का कहना है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग को लेकर बातचीत सामान्य प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है।इस समझौते को लेकर अब दुनिया की नजरें अमेरिका और सऊदी अरब के अगले कदम पर हैं। अगर सऊदी अरब इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। वहीं, अगर दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर सहमति नहीं बनती है तो यह परमाणु समझौता एक बार फिर लंबे समय के लिए अटक सकता है।