Trump on Oil Price: ईरान से जंग के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, तेल 2 डॉलर से नीचे आने की उम्मीद; क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिलेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक नीचे रहते हैं, तो इसका असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप के मुताबिक तेल की कीमत पहले करीब 3 डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और इसके बाद यह 2 डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जाने की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि कीमतों में यह गिरावट तेजी से देखने को मिलेगी।
अभी अमेरिकी बाजार में क्या है तेल का भाव?
8 सितंबर को अमेरिकी बाजार में होलसेल RBOB गैसोलीन की कीमत करीब 3.22 डॉलर प्रति गैलन बताई गई, जबकि होलसेल हीटिंग ऑयल का भाव करीब 4.67 डॉलर प्रति गैलन था।
ऐसे में ट्रंप का 2 डॉलर से नीचे तेल पहुंचने का दावा बाजार के मौजूदा स्तर की तुलना में बड़ी गिरावट की ओर इशारा करता है।
क्या 50 फीसदी सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल?
ट्रंप के दावे के आधार पर अगर तेल की कीमत करीब 4 डॉलर से घटकर 2 डॉलर प्रति गैलन के आसपास आती है, तो गिरावट काफी बड़ी होगी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल भी सीधे 50 फीसदी सस्ते हो जाएंगे।
पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत सिर्फ कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करती। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन, टैक्स, डीलर मार्जिन और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड सस्ता होने का असर घरेलू ईंधन की कीमत पर पड़ सकता है, लेकिन कमी का अनुपात अलग हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का दावा
ईरान के साथ तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट भी लगातार चर्चा में है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
ट्रंप पहले भी दावा करते रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नियंत्रण है। उन्होंने हाल में इसका नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' रखने का सुझाव देने की बात भी कही थी।
अगर इस क्षेत्र में तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य रहती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है।
अमेरिकी सेना ने 94 जहाजों का रास्ता बदला
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने की कार्रवाई को लेकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी जानकारी साझा की है।
CENTCOM के अनुसार, 7 सितंबर तक अमेरिकी सेनाओं ने प्रतिबंधों को लागू कराने के दौरान 94 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला, जबकि तीन जहाज क्षतिग्रस्त हुए और दो पर कब्जा किया गया।
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि USS George H.W. Bush अरब सागर में इन कार्रवाइयों को लागू करने में सहायता कर रहा था।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी ट्रंप का बयान
ट्रंप ने तेल की कीमतों पर बात करते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के बीच ट्रंप के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार के साथ-साथ वैश्विक राजनीति पर भी नजर बनी रहेगी।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
अगर वास्तव में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी और टिकाऊ गिरावट आती है, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को फायदा हो सकता है। इससे आयात लागत कम होने और ईंधन की कीमतों पर दबाव घटने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता होगा, यह केवल क्रूड ऑयल की कीमत से तय नहीं होगा। सरकार के टैक्स, कंपनियों की कीमत नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी।
फिलहाल ट्रंप का दावा वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा संकेत जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक असर तभी साफ होगा जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार और वास्तविक गिरावट देखने को मिले।