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Breaking News : दुनिया ने ली राहत की सांस! अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर हुए हस्ताक्षर, ट्रंप चिल्लाकर बोले - 'डील साइन....' 

 

युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता (MoU) हुआ है। अल जज़ीरा के मुताबिक, ट्रंप ने बुधवार को पेरिस के वर्साय पैलेस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। बाद में, ईरान के राष्ट्रपति ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर हस्ताक्षर किए। गुरुवार सुबह 5:00 बजे (भारतीय समय) घोषणा के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया।

इस समझौते के तहत ईरान में युद्ध खत्म होना है और लेबनान में संघर्ष को रोकने के लिए प्रावधान किए गए हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की शर्तें भी शामिल हैं। हालांकि शांति समझौते पर मूल रूप से 19 जून को जिनेवा के पास ल्यूसर्न शहर में हस्ताक्षर होने थे, लेकिन इस पर एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में हस्ताक्षर किए गए।

1. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के लक्ष्य पूरे हुए; उम्मीद से ज़्यादा

ट्रंप के मुताबिक, उनके लक्ष्य - युद्ध खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना - पूरे हो गए हैं।

2. समझौते का पालन न करने पर बमबारी की चेतावनी

ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन करता है तो उस पर फिर से बमबारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

3. चीन ने दोनों पक्षों से समझौते का पूरी तरह पालन करने को कहा

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि सभी पक्षों को युद्धविराम का पालन करना चाहिए। चीन ने ईरान और लेबनान को मानवीय सहायता देने की योजना की भी घोषणा की।

4. लीक हुए ड्राफ्ट में 14 मुद्दों पर सहमति का दावा

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान समझौते के ड्राफ्ट में 14 मुद्दों पर सहमति दिखती है, जिनमें युद्ध खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना, तेल निर्यात, प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज़ किए गए फंड को जारी करना शामिल है। 

5. जेडी वेंस का कहना है कि ईरान को अमेरिका से एक डॉलर भी नहीं मिलेगा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि 300 अरब डॉलर के पैकेज की खबरें भ्रामक हैं। अगर ईरान शर्तों को पूरा करता है, तो दूसरे देश निवेश कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका फंड नहीं देगा।