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ट्रम्प प्रशासन और क्यूबा‑वेनेज़ुएला‑ईरान विवाद, वीडियो में देखें 65 वर्ष के तनाव का नया अध्याय

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका‑क्यूबा रिश्तों में एक बार फिर गहन तनाव और राजनीतिक उथल‑पुथल देखने को मिल रही है। यह संबंध दशकों से चली आ रही कूटनीतिक दूरी और प्रतिबंधों से जटिल बना हुआ है, लेकिन 2026 में इसे एक नया मोड़ मिल गया है।

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ट्रम्प प्रशासन ने क्यूबा के साथ चल रहे पुराने राष्ट्रव्यापी आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त कर दिया है, जिससे क्यूबा में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई और व्यापक बिजली कटौती जैसी समस्याएं सामने आईं। हाल ही में क्यूबा में 29 घंटे तक सरकारी ग्रिड ठप रहने जैसी घटनाएँ हुईं, जिससे लाखों नागरिक प्रभावित हुए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बिजली की कमी वहारा है क्योंकि ऊर्जा उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित है।

ट्रम्प ने बयान दिया है कि वह क्यूबा पर “कभी भी जो मन चाहे कर सकते हैं” और संकेत दिया कि वह वहां राजनीतिक बदलाव चाहते हैं, साथ ही उन्होंने एक संभावित “फ्रेंडली टेकओवर” की तरफ भी संकेत दिए। क्यूबा से लोगों की प्रतिक्रिया विभिन्न है — कई नागरिक संवाद और कार्रवाई नहीं, बल्कि शांति और वार्ता की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कुछ प्रशासन की हरकतों से नाराज हैं और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

यह विवाद अमेरिका‑वेनेज़ुएला तनाव से भी जुड़ा हुआ है। ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका ने 2025‑26 में वेनेज़ुएला में सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाया, जिसमें तेल की आपूर्ति रोकने जैसे कदम शामिल हैं। वेनेज़ुएला लंबे समय से अमेरिका और क्यूबा के बीच एक प्रमुख रणनीतिक सहयोगी रहा है।

इसी बीच, मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका‑इजराइल के बीच तनाव भी बढ़ा है। ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाते हुए पिछले महीनों में कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संघर्ष देखा गया है, जिससे अमेरिका के विदेश नीति फैसलों पर आलोचना भी बढ़ी है। इस सबके बीच अमेरिका के कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने भी इस्तीफे दिए, यह कहते हुए कि ईरान से तत्काल किसी खतरे का प्रमाण नहीं था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह कूटनीति चालाकी भरी रणनीति और दबाव‑आधारित संकेत भेज रही है ताकि अमेरिका की प्रभावशीलता और शक्ति का संदेश विश्व स्तर पर मजबूत हो। हालांकि, बढ़ते प्रतिबंधों और ब्लॉकडेड के कारण क्यूबा, वेनेज़ुएला जैसे देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे मानवीय समस्याएँ भी बढ़ रही हैं।

ट्रम्प की आलोचना भी तेज हो रही है, खासकर जब उसने स्पष्ट कहा कि वह “क्यूबा पर कब्जा करने का सम्मान पाना चाहते हैं”, जिस पर कई देशों ने इसका कड़ा विरोध किया है।

इस स्थिति का वैश्विक प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। ऊर्जा संकट, तेल की आपूर्ति में बदलाव, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण व्यापार पर असर और राजनीतिक अस्थिरता, इन सब कारणों से अंतरराष्ट्रीय बाजार और कूटनीति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।