अमेरिका के अमीर परिवारों में बढ़ा 3 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने का चलन, रुतबे की निशानी बना बड़ा परिवार
अमेरिका में अमीर परिवारों के बीच ज्यादा बच्चे पैदा करने का चलन तेजी से चर्चा में है। जहां महंगाई और बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च आम परिवारों को छोटा परिवार रखने के लिए मजबूर कर रहा है, वहीं देश के सबसे अमीर परिवारों में तीन या उससे ज्यादा बच्चे होना स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सबसे अमीर 1% परिवारों में करीब आधे परिवारों के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं। दूसरी ओर, कम आय वाले परिवारों में तीन बच्चों वाले परिवारों की हिस्सेदारी करीब 40 से 43% है। रिपोर्ट बताती है कि अमीर परिवारों में बड़े परिवार रखने का चलन 1990 के दशक से बना हुआ है, जबकि कम कमाई वाले परिवारों में यह प्रवृत्ति घट रही है।
तीसरे बच्चे को माना जा रहा स्टेटस सिंबल
अर्थशास्त्री माइक कॉन्जल के मुताबिक, अमीर परिवारों के लिए तीसरा बच्चा अब रुतबे की निशानी बनता जा रहा है। आर्थिक रूप से मजबूत परिवार बच्चों की परवरिश पर होने वाले भारी खर्च को आसानी से उठा सकते हैं। वहीं, मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए बढ़ती महंगाई के बीच बड़े परिवार का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
आम परिवारों को मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल, बचत, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा जैसे खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में परिवार में एक और बच्चा जुड़ने से आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं।
18 साल में एक बच्चे की परवरिश पर खर्च होते हैं 3 करोड़ रुपये
अमेरिकी कंपनी लेंडिंगट्री की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में एक बच्चे को जन्म से 18 साल की उम्र तक पालने पर औसतन करीब 3 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से हर साल लगभग 15 लाख रुपये का खर्च आता है।
इसमें बच्चे का खाना, रहने की व्यवस्था, परिवहन, स्वास्थ्य बीमा और देखभाल जैसी जरूरतें शामिल हैं। हालांकि, वास्तविक खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति, शहर और जीवनशैली के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
शुरुआती पांच साल में सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ
बच्चे की परवरिश के शुरुआती पांच साल परिवार के लिए सबसे महंगे साबित होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान हर साल औसतन करीब 26 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। इसकी प्रमुख वजह डे-केयर और बच्चों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं का महंगा होना है।
वहीं, 6 से 18 साल की उम्र के दौरान औसत सालाना खर्च घटकर करीब 10.7 लाख रुपये रह जाता है। इस उम्र में भी खानपान, शिक्षा, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर लगातार खर्च करना पड़ता है।
इस तरह अमेरिका में बच्चों की परवरिश की बढ़ती लागत अमीर और मध्यम वर्गीय परिवारों के बीच आर्थिक अंतर को भी उजागर कर रही है। जहां अमीर परिवार बड़े परिवार को अपनी आर्थिक क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ रहे हैं, वहीं आम परिवारों के लिए बच्चों की संख्या का फैसला अब काफी हद तक बजट पर निर्भर होता जा रहा है।