अमेरिका में 3 बच्चे पैदा करने का चलन बढ़ा: अमीरों के लिए बड़ा परिवार बना स्टेटस सिंबल, एक बच्चे की परवरिश पर खर्च होंगे 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा
अमेरिका में परिवार और बच्चों को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है। यहां अमीर परिवारों में तीन या उससे ज्यादा बच्चे होने का चलन बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अब बड़ा परिवार केवल पारिवारिक पसंद नहीं, बल्कि आर्थिक संपन्नता और सामाजिक रुतबे की निशानी के तौर पर भी देखा जा रहा है। महंगी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, घर और बच्चों की देखभाल के बढ़ते खर्च के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए तीसरा बच्चा पैदा करना मुश्किल होता जा रहा है।
वॉशिंगटन पोस्ट और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरल रिजर्व के घरेलू वित्त सर्वेक्षण के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि अमेरिका के सबसे अमीर 1 प्रतिशत परिवारों में तीन या उससे अधिक बच्चे होने की संभावना दूसरे आय वर्गों के मुकाबले ज्यादा है। अर्थशास्त्री माइक कॉन्जल ने 2013 से 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है।
अमेरिका के सबसे अमीर परिवारों में 49% के तीन या ज्यादा बच्चे
विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले 1 प्रतिशत परिवारों में करीब 49 प्रतिशत के तीन या उससे अधिक बच्चे हैं। वहीं, बाकी ज्यादातर आय वर्गों में यह आंकड़ा लगभग 40 से 43 प्रतिशत के बीच है।अगर परिवारों की संपत्ति के आधार पर आंकड़े देखें तो देश के सबसे अमीर 1 प्रतिशत परिवारों में करीब 50 प्रतिशत के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं। इससे पता चलता है कि आर्थिक रूप से बेहद मजबूत परिवारों में बड़ा परिवार रखने का चलन बना हुआ है, जबकि अन्य आय वर्गों में तीसरा बच्चा पैदा करने की प्रवृत्ति कम हुई है।रिपोर्ट में इसे बड़े परिवार को आर्थिक रूप से संभाल पाने की क्षमता से जोड़कर देखा गया है।
एक बच्चे की परवरिश पर 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च
अमेरिका में बच्चों की परवरिश बेहद महंगी हो गई है। 2026 के एक अनुमान के अनुसार, एक बच्चे को जन्म से 18 साल की उम्र तक पालने पर औसतन 3,03,418 डॉलर खर्च होते हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है।इस खर्च में घर, भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों की देखभाल जैसी जरूरतें शामिल हैं। हालांकि, इसमें कॉलेज की पढ़ाई का खर्च शामिल नहीं है। अगर बच्चे की उच्च शिक्षा का खर्च भी जोड़ा जाए तो कुल रकम और बढ़ सकती है।महंगे शहरों में बच्चों की देखभाल और पढ़ाई का खर्च औसत से काफी ज्यादा हो सकता है। यही वजह है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए तीन बच्चों की परवरिश करना बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है।
तीसरे बच्चे के साथ बढ़ जाती है जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले और दूसरे बच्चे के बाद तीसरे बच्चे की जिम्मेदारी कई परिवारों के बजट को प्रभावित करती है। खासकर कामकाजी माता-पिता के लिए बच्चों की देखभाल, स्कूल, स्वास्थ्य और अन्य गतिविधियों पर लगातार खर्च करना मुश्किल हो सकता है।तीसरे बच्चे के आने से कई परिवारों को लंबे समय तक अतिरिक्त चाइल्ड केयर की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा बड़े घर, अधिक जगह और परिवहन जैसी जरूरतें भी बढ़ जाती हैं। अमीर परिवार इन खर्चों को आसानी से संभाल सकते हैं, क्योंकि उनके पास घरेलू सहायकों, नैनी और बेहतर सुविधाओं पर खर्च करने की क्षमता होती है।हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी परिवार की आर्थिक स्थिति तय नहीं की जा सकती।
अमेरिकी चाहते हैं तीन बच्चे, लेकिन औसत 1.6
अमेरिका में बड़े परिवार की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या भी काफी है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में 2025 के गैलप सर्वे का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, करीब 42 प्रतिशत अमेरिकी तीन या उससे ज्यादा बच्चों को आदर्श परिवार का आकार मानते हैं।लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। अमेरिका में प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या करीब 1.6 है। यानी लोग जितने बच्चे चाहते हैं, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उतने बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी चाइल्ड केयर, मकानों की बढ़ती कीमतें और बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च इस अंतर की बड़ी वजह हैं।
बड़ा परिवार बना आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक
अमेरिका में तीन या उससे ज्यादा बच्चे रखने का ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि परिवार का आकार अब आर्थिक क्षमता से भी जुड़ता जा रहा है। जहां मध्यमवर्गीय परिवार खर्चों को देखते हुए एक या दो बच्चों तक सीमित रहना पसंद कर रहे हैं, वहीं संपन्न परिवार बड़े परिवार की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम हैं।हालांकि, इसे पूरे अमेरिका का सामान्य ट्रेंड नहीं माना जा सकता। उपलब्ध आंकड़े मुख्य रूप से सबसे अमीर परिवारों और अन्य आय वर्गों के बीच अंतर दिखाते हैं। फिलहाल बड़ा परिवार रखने की इच्छा और उसे आर्थिक रूप से संभाल पाने की क्षमता के बीच का अंतर अमेरिकी समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है।