प्रिंसिपल ने समय पर लिया फैसला, फुटेज में देंखे 900 छात्रों की बची जान; कुछ मिनट बाद बाढ़ में बह गया पूरा स्कूल
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच एक स्कूल प्रिंसिपल के समय पर लिए गए फैसले ने करीब 900 छात्रों की जान बचा ली। त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को जैसे ही बाढ़ की चेतावनी मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए स्कूल खाली कराने का फैसला किया। छात्रों और कर्मचारियों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। कुछ ही देर बाद जिस स्कूल परिसर में बच्चे मौजूद थे, वह तेज पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे के सैलाब में पूरी तरह बह गया।
चेतावनी मिलते ही खाली कराया स्कूल
26 अगस्त को नेपाल के कई इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी दौरान त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को बाढ़ आने की सूचना मिली। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए स्कूल में मौजूद छात्रों को तुरंत बाहर निकालने का निर्देश दिया।स्कूल में कुल 1,643 छात्र पढ़ते हैं। जिस समय आपदा आई, उस वक्त करीब 900 छात्र कैंपस में मौजूद थे। प्रिंसिपल ने सभी बच्चों को सुरक्षित निकालकर पास की ऊंची पहाड़ी की ओर ले जाने का फैसला किया।
पहाड़ी पर पहुंचे छात्र, कुछ देर बाद बह गया स्कूल
प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी खुद छात्रों के साथ सुरक्षित स्थान की ओर गए। छात्र जैसे ही स्कूल परिसर से निकलकर ऊंची जगह पहुंचे, कुछ ही देर बाद हालात बेहद भयावह हो गए।तेज पानी के साथ कीचड़, बड़ी-बड़ी चट्टानें और मलबा बहता हुआ स्कूल परिसर की तरफ आया। देखते ही देखते बाढ़ का तेज बहाव स्कूल की पूरी इमारत को अपने साथ बहाकर ले गया। अगर छात्र उस समय स्कूल में मौजूद होते तो बड़ी संख्या में जनहानि हो सकती थी।समय रहते स्कूल खाली कराने के प्रिंसिपल के फैसले को अब बड़ी त्रासदी को टालने वाला कदम माना जा रहा है।
दो कर्मचारी अब भी लापता
इस हादसे में स्कूल के दो कर्मचारी समय रहते बाहर नहीं निकल सके। दोनों के अब तक लापता होने की जानकारी सामने आई है। उनकी तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, छात्रों के सुरक्षित बच निकलने से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बिगड़े हालात
बताया जा रहा है कि 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल के कई इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज पानी और मलबे के बहाव ने भारी तबाही मचाई। कई सड़कें, पुल, मकान और अन्य इमारतें इसकी चपेट में आ गईं।आपदा के दौरान कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं।
955 लोगों की मौत, 4400 से ज्यादा लापता
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और तिब्बत में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक 955 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक राहत टीमों की पहुंच अभी मुश्किल बनी हुई है।ऐसे भयावह हालात के बीच त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी का समय पर लिया गया फैसला एक मिसाल बनकर सामने आया है। अगर उन्होंने बाढ़ की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्कूल खाली नहीं कराया होता, तो करीब 900 छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उनकी सतर्कता और त्वरित निर्णय ने एक बड़े हादसे को और भी भयावह होने से रोक दिया।