हूतियों का बड़ा दावा: सऊदी अरामको की जजान रिफाइनरी पर 3 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला, वीडियो में देंखे तेल ढांचे पर फिर बढ़ा खतरा
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको ऑयल रिफाइनरी पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। हूतियों का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में यमन में उनके ठिकानों पर किए गए सऊदी हवाई हमलों के जवाब में की गई है। हालांकि, सऊदी सरकार और सऊदी अरामको की ओर से अभी तक रिफाइनरी पर सीधे मिसाइल गिरने या किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सऊदी की अहम रिफाइनरी पर हमले का दावा
हूती विद्रोहियों के अनुसार, निशाना बनाई गई जजान रिफाइनरी सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग 4 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखती है और इसे देश की पांचवीं सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी माना जाता है।लाल सागर के तट पर स्थित यह संयंत्र घरेलू आपूर्ति के साथ-साथ तेल निर्यात नेटवर्क के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में इस पर किसी भी संभावित हमले का असर क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
यमन में हवाई हमलों के बाद बढ़ा तनाव
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में सऊदी अरब ने मन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। हूतियों ने इन हमलों के जवाब में सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
सोशल मीडिया पर आग और धुएं के वीडियो
हमले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें रिफाइनरी क्षेत्र से आग और धुएं का गुबार उठता दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।सऊदी सरकार और अरामको ने अभी तक यह नहीं बताया है कि रिफाइनरी को कोई प्रत्यक्ष नुकसान पहुंचा है या नहीं। आधिकारिक बयान आने का इंतजार किया जा रहा है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से हूती विद्रोहियों के दावों पर आधारित है। सऊदी अधिकारियों या अरामको की ओर से किसी बड़े नुकसान, उत्पादन में बाधा या हताहतों की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमले के वास्तविक प्रभाव को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और ऊर्जा बाजार की भी नजर बनी हुई है।