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होर्मुज स्ट्रेट में तनाव: भारत आ रहे तेल-गैस के जहाजों पर ईरान की फायरिंग, वीडियो में देंखे कूटनीतिक स्तर पर विरोध

 

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में शनिवार को एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब भारत की ओर आ रहे कच्चे तेल और गैस से लदे जहाजों को ईरान की ओर से रोका गया और उन पर गोलीबारी की गई। इस घटना ने न केवल समुद्री सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भारत-ईरान संबंधों में भी तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भारत आ रहे कुल 14 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रोक दिया। इस दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जहाजों पर फायरिंग की गई। गोलीबारी के बाद 13 जहाजों को अपनी दिशा बदलकर फारस की खाड़ी में अलग-अलग स्थानों पर लौटना पड़ा। इनमें से एक जहाज को गोली लगने की भी पुष्टि हुई है, जिससे उसकी संरचना को नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि एक जहाज किसी तरह स्ट्रेट पार करने में सफल रहा।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

घटना के बाद भारत सरकार ने तुरंत कूटनीतिक कदम उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथअली को तलब किया और इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है और इससे दोनों देशों के बीच स्थापित विश्वास को ठेस पहुंचती है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में यह भी कहा गया कि ईरान पहले भी भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करता रहा है, इसलिए इस परंपरा को बनाए रखते हुए जल्द से जल्द जहाजों की आवाजाही सामान्य की जानी चाहिए। भारत ने यह भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत हो सकती है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर न केवल भारत बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

फिलहाल, भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अपने जहाजों तथा नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि स्थिति को सामान्य किया जा सके।