अमेरिका के दबाव के बीच ईरान को मिला चीन का साथ, तेहरान बोला- रिश्ते के लिए किसी की मंजूरी जरूरी नहीं
अमेरिका की ओर से ईरान पर बढ़ते आर्थिक दबाव और नौसैनिक नाकाबंदी के बीच चीन ने तेहरान के समर्थन में अपना रुख साफ कर दिया है। बीजिंग ने एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करते हुए कहा है कि ईरान के साथ चीन का सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है और इसे बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
ईरान ने चीन के इस रुख का स्वागत किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित है और इसे आगे बढ़ाने के लिए किसी तीसरे पक्ष की अनुमति की जरूरत नहीं है।
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया गलत
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेश के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का चीन विरोध करता है। बीजिंग का कहना है कि अधिकतम दबाव और आर्थिक युद्ध समस्याओं का समाधान नहीं करते, बल्कि तनाव और आर्थिक अस्थिरता को बढ़ाते हैं।
चीन ने बातचीत और कूटनीतिक रास्ते से विवाद सुलझाने की अपील की है। साथ ही उसने संकेत दिया है कि अगर उसके हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाए जाते हैं तो वह अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई करेगा।
ईरान के लिए क्यों अहम है चीन का समर्थन?
ईरान के लिए चीन बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ा है और चीन ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, नाकाबंदी के बाद चीन पहुंचने वाले ईरानी तेल की मात्रा में भी बड़ी गिरावट आई है।
ऐसे समय में बीजिंग का तेहरान के साथ व्यापारिक संबंध जारी रखने का रुख ईरान के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
अमेरिका की नाकाबंदी से ईंधन संकट गहराया
अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी का असर अब ईरान के घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान में पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है और तेहरान समेत कई इलाकों में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कुछ लोगों को ईंधन भरवाने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि घरेलू गैसोलीन उत्पादन देश की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है और मौजूदा परिस्थितियों में आयात करना भी मुश्किल हो गया है।
होर्मुज को लेकर ईरान का सख्त रुख
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से नाकाबंदी और तेल प्रतिबंध हटाए जाने तक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का फैसला नहीं किया जाएगा। ईरान की मांगों में नाकाबंदी हटाना, तेल प्रतिबंध खत्म करना और विदेशों में जमा उसकी संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक तनाव बने रहने से तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
चीन-अमेरिका टकराव बढ़ने का खतरा
ईरान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका के बीच मतभेद ऐसे समय में सामने आए हैं जब वॉशिंगटन ने ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों और देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है। चीन पहले ही कह चुका है कि वह अपने वैध आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।
ऐसे में ईरान पर अमेरिकी दबाव सिर्फ तेहरान और वॉशिंगटन के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है। चीन के खुलकर विरोध में आने से यह मामला पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक व्यापार और कूटनीति के लिए भी अहम बनता जा रहा है।