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नेपाल में बाढ़ की ऐसी तबाही कि पुनर्निर्माण पर GDP से भी ज्यादा खर्च, वीडियो में जाने 4.52 लाख करोड़ का अनुमान

 

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन से हजारों घर, सड़कें, पुल और जरूरी सरकारी ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। अब इस तबाही से उबरने और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण पर 4.52 लाख करोड़ भारतीय रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। यह रकम नेपाल की करीब 4.32 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। यानी बाढ़ से हुई तबाही की कीमत देश की सालाना आर्थिक क्षमता से भी बड़ी हो गई है।

16 लाख लोग प्रभावित, 1377 मौतें

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भयंकर बाढ़ से नेपाल में करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1,377 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 5,130 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं।बाढ़ का असर सिर्फ लोगों के घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के परिवहन और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।

सड़क, पुल और बिजली पर खर्च होगा सबसे ज्यादा

अनुमानित पुनर्निर्माण लागत में सबसे बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में खर्च होगा। कुल अनुमानित लागत का करीब 75 फीसदी यानी 2.96 लाख करोड़ रुपए सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं के पुनर्निर्माण पर खर्च होने का अनुमान है।बाढ़ से 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन इमारतों के पुनर्निर्माण और मरम्मत पर भी बड़ी रकम खर्च करनी होगी। इससे साफ है कि नेपाल के सामने राहत कार्यों के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाली पुनर्निर्माण की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 545 लोग लापता

बाढ़ की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी है। यहां 545 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है।रेस्क्यू टीमें सुरंगों, हेडवर्क्स और मलबे के बीच लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों और भारी मलबे के कारण बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद लापता लोगों को खोजने के लिए अभियान जारी है।

नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती

नेपाल के लिए यह आपदा केवल तत्काल राहत का संकट नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन के साथ देश को अपने सड़क नेटवर्क, बिजली व्यवस्था, सरकारी भवनों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को दोबारा खड़ा करना होगा।

4.52 लाख करोड़ रुपए के अनुमानित पुनर्निर्माण खर्च ने आपदा की गंभीरता को सामने ला दिया है। यह रकम नेपाल की GDP से भी अधिक है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस आपदा का आर्थिक असर कितने लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है। अब राहत के साथ पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर नेपाल का बड़ा फोकस रहेगा।