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Strait of Hormuz Crisis: होर्मुज में ईरान का नया प्लान आया सामने! भारत के तेल और LPG पर कितना पड़ेगा असर?
 

 

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री ऊर्जा लाइनों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने ऐलान किया है कि वह होर्मुज के आसपास एक नया प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र बनाने की तैयारी कर रहा है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक इस क्षेत्र की शुरुआत उस जगह से होगी जहां अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी है और यह फारस की खाड़ी की तरफ तक फैलेगा।

ईरान के इस कदम के साथ ओमान के साथ मिलकर एक नए शिपिंग कॉरिडोर की योजना भी सामने आई है। रेजाई के मुताबिक नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री कॉरिडोर के नक्शे पर ईरान और ओमान के बीच सहमति बन चुकी है और इसे जल्द औपचारिक रूप दिया जा सकता है। प्रस्तावित रास्ता ईरान और ओमान दोनों के जलक्षेत्र से होकर गुजरेगा और इसके प्रबंधन में ईरान की भूमिका होगी।

बिना अनुमति जहाजों पर बढ़ सकता है दबाव
ईरान का कहना है कि नए प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को उसकी शर्तों का पालन करना होगा। रेजाई ने कहा है कि इस क्षेत्र में आने वाले जहाजों को ईरान की प्रतिबंध सूची में डाला जा सकता है। हालांकि इस क्षेत्र की सटीक सीमाएं और इसे लागू करने का पूरा तरीका अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
ईरान पहले से ही होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए अपनी ओर से तय किए गए नेविगेशन रूट का समर्थन करता रहा है। मौजूदा तनाव के बीच समुद्री यातायात में भी बड़ी गिरावट आई है। रॉयटर्स के मुताबिक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही मई के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है।

ओमान के साथ ईरान की डील क्यों अहम है?
ईरान और ओमान पिछले कुछ समय से होर्मुज के जरिए सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक अस्थायी कॉरिडोर पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने अगस्त में भी इस दिशा में एक ढांचे पर सहमति जताई थी। हालांकि प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर टोल या शुल्क का मुद्दा अभी पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ रिपोर्टों में ईरान की ओर से जहाजों से शुल्क लेने की संभावना का जिक्र है जबकि ओमान की ओर से पहले कहा गया था कि भविष्य की व्यवस्था में टोल शामिल नहीं होगा।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया से आने वाले ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से जुड़ा है। खासतौर पर LPG के मामले में भारत की निर्भरता काफी अधिक है। भारत सरकार के मुताबिक देश की LPG खपत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात से आता है और इन LPG आयातों का लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर भी इस संकट का असर पड़ सकता है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी तरह की बड़ी रुकावट वैश्विक तेल बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल सकती है। मौजूदा तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका था।

भारत के लिए ओमान क्यों बन सकता है अहम रास्ता?
भारत और ओमान के बीच आर्थिक संबंधों को भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम माना जा रहा है। भारत-ओमान CEPA के तहत ओमान ने भारतीय निर्यात के 99.38 प्रतिशत मूल्य पर शुल्क मुक्त बाजार पहुंच दी है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होने के कारण ओमान के साथ बना कोई सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि भारत को नए कॉरिडोर में विशेष छूट मिलेगी या जहाजों पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा। फिलहाल ईरान के प्रस्ताव की अंतिम शर्तें और उसके लागू होने की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
क्या भारत पर सीधे पड़ेगा असर?
अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई और शिपिंग लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे भारत के आयात बिल और घरेलू ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ने की संभावना रहेगी।
भारत सरकार पहले ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैकल्पिक इंतजामों पर जोर दे चुकी है। मार्च में सरकार ने बताया था कि भारत के करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात को होर्मुज से बाहर के रास्तों से रूट किया जा रहा था। इसके बावजूद LPG के मामले में होर्मुज की अहमियत काफी ज्यादा बनी हुई है।
फिलहाल ईरान का नया प्रतिबंधित क्षेत्र और ओमान के साथ प्रस्तावित समुद्री कॉरिडोर पश्चिम एशिया के बदलते समुद्री समीकरण का संकेत है। अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार के साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ सकता है।