Starship Test Flight: पहली बार ऑर्बिट में पहुंचा SpaceX का Starship, 26 Starlink सैटेलाइट भी किए लॉन्च
स्पेसएक्स के सबसे महत्वाकांक्षी रॉकेट Starship ने 28 सितंबर 2026 को अपनी टेस्ट फ्लाइट में एक अहम उपलब्धि हासिल की। पहली बार स्टारशिप ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक पहुंचा। इस मिशन के दौरान कंपनी ने 26 नए Starlink V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में भेजे।
भारतीय समयानुसार स्टारशिप को शाम 6:16 बजे लॉन्च किया गया। शुरुआती योजना के मुताबिक इसे करीब 10 घंटे तक पृथ्वी की कक्षा में रहना था, लेकिन मिशन के दौरान कंट्रोलर्स ने फ्लाइट को तय समय से पहले समाप्त करने का फैसला किया। लॉन्च के करीब 2 घंटे 12 मिनट बाद डी-ऑर्बिट बर्न पूरा किया गया और मिशन के लगभग तीसरे घंटे में स्टारशिप को प्रशांत महासागर में उतारा गया।
ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक पहुंचना क्यों अहम?
स्टारशिप को स्पेसक्राफ्ट और सुपर हेवी बूस्टर के संयुक्त सिस्टम के तौर पर जाना जाता है। इसकी ऊंचाई करीब 403 फीट है। इससे पहले की टेस्ट फ्लाइट्स में इसे सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक ही भेजा जाता था।
सब-ऑर्बिटल उड़ान में वाहन अंतरिक्ष की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद पृथ्वी की कक्षा में लगातार चक्कर नहीं लगाता और वापस लौट आता है। इसके विपरीत ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में वाहन इतनी गति हासिल करता है कि वह पृथ्वी की कक्षा में बना रह सकता है।
पहली बार लॉन्च हुए Starlink V3 सैटेलाइट
इस मिशन में पहली बार Starlink V3 तकनीक वाले 26 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डेटा क्षमता जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इस हिसाब से 26 सैटेलाइट्स मिलकर करीब 26 Tbps क्षमता जोड़ सकते हैं।
13 टेस्ट के बाद यहां पहुंचा Starship
स्टारशिप की मौजूदा उपलब्धि कई टेस्ट फ्लाइट्स के बाद हासिल हुई है। अलग-अलग मिशनों में कंपनी ने बूस्टर रिकवरी, स्पेसक्राफ्ट की री-एंट्री, सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट और पानी में लैंडिंग जैसी तकनीकों को परखा।
13वां टेस्ट: 25 जुलाई 2026 को हुई इस उड़ान में अपर स्टेज ने हिंद महासागर में और बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। पहली बार स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को पानी में सुरक्षित उतरने के बाद तैरते हुए देखा गया।
12वां टेस्ट: इस मिशन में नए और बड़े V3 वर्जन का इस्तेमाल किया गया। उड़ान के दौरान इंजन से जुड़ी समस्या सामने आने के बावजूद स्पेसक्राफ्ट करीब एक घंटे बाद हिंद महासागर में लैंड करने में सफल रहा।
11वां टेस्ट: 14 अक्टूबर 2025 की उड़ान में बूस्टर और स्टारशिप की वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस मिशन का फोकस भविष्य में रॉकेट को लॉन्च साइट के करीब वापस लाने से जुड़ी तकनीकों की टेस्टिंग पर था।
10वां टेस्ट: 27 अगस्त 2025 को हुए इस मिशन में Starlink सिम्युलेटर सैटेलाइट्स को तैनात करने और इंजन से जुड़े परीक्षण किए गए। इस उड़ान ने सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने में मदद की।
इससे पहले कई टेस्ट में आई थीं मुश्किलें
Starship की विकास यात्रा में कई उड़ानों के दौरान तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं। जून 2025 में एक स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान रॉकेट में विस्फोट हुआ था। इससे पहले 9वें टेस्ट में बूस्टर की लैंडिंग हुई, लेकिन स्पेसक्राफ्ट ने उड़ान के दौरान कंट्रोल खो दिया था।
8वें टेस्ट में बूस्टर वापस लौटने में सफल रहा, लेकिन स्पेसक्राफ्ट के कई इंजन बंद होने के बाद फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम सक्रिय करना पड़ा। 7वें टेस्ट में भी बूस्टर वापस आया, जबकि स्पेसक्राफ्ट उड़ान के दौरान नष्ट हो गया।
5वें टेस्ट में पहली बार हुआ था बूस्टर का कैच
13 अक्टूबर 2024 को हुए 5वें टेस्ट में स्टारशिप कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली थी। सुपर हेवी बूस्टर को लॉन्च साइट पर वापस लाकर मैकेजिला नाम के कैचिंग सिस्टम से पकड़ा गया था।
वहीं स्पेसक्राफ्ट की नियंत्रित री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई। इस मिशन के दौरान री-एंट्री के समय वाहन को अत्यधिक तापमान और करीब 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
पहले चार टेस्ट में लगातार जुटाया गया डेटा
2024 के चौथे टेस्ट में स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष तक भेजने के बाद वापस पृथ्वी के वातावरण में लाकर समुद्र में उतारा गया। तीसरे टेस्ट में स्टारशिप ने ऑर्बिट तक पहुंचने के बाद पेलोड डोर से जुड़े परीक्षण और क्रायोजेनिक ट्रांसफर जैसे प्रयोग किए, हालांकि री-एंट्री के दौरान संपर्क टूट गया।
दूसरे टेस्ट में पहली बार हॉट-स्टेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप को अलग किया गया। हालांकि बाद में दोनों चरणों में तकनीकी समस्याएं सामने आईं।
20 अप्रैल 2023 को हुए पहले टेस्ट में स्टारशिप लॉन्च के करीब चार मिनट बाद नष्ट हो गया था। इसके बावजूद उस उड़ान से मिले डेटा ने आगे के परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई।
अब आगे क्या?
28 सितंबर की उड़ान के साथ स्टारशिप विकास कार्यक्रम ने पहली बार ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक पहुंचने और Starlink V3 सैटेलाइट्स को तैनात करने की दिशा में महत्वपूर्ण परीक्षण पूरा किया है। अब इन परीक्षणों से मिले डेटा के आधार पर कंपनी आगे की उड़ानों में सिस्टम की विश्वसनीयता, री-एंट्री और रिकवरी से जुड़ी तकनीकों को और विकसित करने पर काम करेगी।