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Saudi Arabia-Houthi Conflict: हूतियों के बढ़ते हमलों से सऊदी की बढ़ी चिंता, इजरायल से खुफिया मदद की खबर
 

 

यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव सितंबर 2026 में एक बार फिर बढ़ गया है. हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है. इसी बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि सऊदी अरब ने हूती गतिविधियों को लेकर इजरायल से खुफिया सहायता मांगी है.

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी और इजरायल के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की मध्यस्थता में संपर्क हुआ. चर्चा का मुख्य मुद्दा हूती बलों की तैनाती और भविष्य में संभावित हमलों से जुड़ी खुफिया जानकारी बताया गया है. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इसे औपचारिक राजनयिक संबंध या व्यापक सैन्य गठजोड़ के रूप में पेश नहीं किया गया है. 

हूतियों के हमलों से सऊदी में बढ़ी सुरक्षा चिंता
14 सितंबर को हूतियों ने किंग खालिद एयर बेस को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया था. हूती पक्ष ने सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने की बात कही, हालांकि नुकसान के उसके दावों की स्वतंत्र रूप से तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी थी.
इसके बाद सऊदी अरब के कई शहरों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, 15 सितंबर को जेद्दा, अबहा, जजान, अलउला, ताइफ और यानबू समेत कई इलाकों में खतरे को लेकर चेतावनी दी गई थी. बाद में सिविल डिफेंस ने इन क्षेत्रों में तत्काल खतरा टलने की जानकारी दी. 

बाब अल-मंडेब पर हूतियों की पकड़ से बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम में बाब अल-मंडेब स्ट्रेट सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है. हाल के दिनों में हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर अपनी पकड़ बढ़ाई है. उन्होंने मोचा और मायून (पेरिम) द्वीप समेत रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है. इससे लाल सागर और बाब अल-मंडेब से गुजरने वाले समुद्री यातायात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है. 
बाब अल-मंडेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. सऊदी अरब के लिए इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ईरान के साथ क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी बाधाओं के बीच लाल सागर मार्ग उसके तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण विकल्प रहा है.
इजरायल से संपर्क की खबर क्यों महत्वपूर्ण?
सऊदी अरब और इजरायल के बीच अभी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं. ऐसे में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के माध्यम से दोनों देशों के बीच कथित सुरक्षा और खुफिया संपर्क की खबर क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल से मिलने वाली संभावित मदद का मुख्य फोकस हूतियों की गतिविधियों, उनकी तैनाती और संभावित अभियानों से संबंधित खुफिया जानकारी हो सकता है. उपलब्ध रिपोर्टों में इसे सीधे तौर पर सऊदी क्षेत्र में इजरायली सैन्य तैनाती के रूप में पेश नहीं किया गया है. 
पाकिस्तान की भूमिका पर भी नजर
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच अगस्त 2026 में संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर भी चर्चा हुई थी. हालांकि, हूतियों के खिलाफ यमन में सीधे सैन्य अभियान में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने यमन में हूतियों के खिलाफ सीधे सैनिक भेजने से दूरी बनाए रखी है, जबकि सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े दायित्वों को अलग विषय माना गया है. इस मुद्दे को लेकर उपलब्ध जानकारी में यह अंतर महत्वपूर्ण है कि सऊदी क्षेत्र की रक्षा और यमन के भीतर सैन्य अभियान एक ही स्थिति नहीं हैं. 

सऊदी के सामने दो समुद्री मार्गों की चुनौती
हूतियों की लाल सागर तट पर बढ़ती मौजूदगी ऐसे समय में हुई है जब सऊदी अरब पहले से ही क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. बाब अल-मंडेब के आसपास बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति दोनों ही सऊदी के तेल निर्यात और समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं.
इसके अलावा, सऊदी अरब के ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को भी ड्रोन हमले के बाद अस्थायी रूप से बंद किया गया था. इससे ऊर्जा आपूर्ति और वैकल्पिक निर्यात मार्गों को लेकर दबाव बढ़ा है. 
फिलहाल क्षेत्रीय घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. हूतियों के हमले, लाल सागर में उनकी बढ़ती मौजूदगी, सऊदी की सैन्य प्रतिक्रिया और अलग-अलग देशों से मिलने वाली सुरक्षा सहायता आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा को प्रभावित कर सकती है.