Russia-Ukraine War: ट्रम्प का बड़ा दावा, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को तैयार रूस-यूक्रेन; जेलेंस्की ने मांगा 60 दिन का सीजफायर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। ट्रम्प ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए।
हालांकि, ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह समझौता कितने समय तक लागू रहेगा। रूस और यूक्रेन की ओर से भी इस कथित सहमति की आधिकारिक पुष्टि और शर्तों का विस्तृत ब्योरा सामने आना बाकी है।
रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज थे ट्रम्प
ट्रम्प पहले भी रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की थी कि ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों से वैश्विक ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। कीव का उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली कमाई और उसकी सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को कमजोर करना है।
रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है और ऊर्जा सुविधाएं भी संघर्ष का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।
जेलेंस्की बोले- रूस हमले रोके तो यूक्रेन भी पीछे हटेगा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले कह चुके हैं कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद करता है, तो उनका देश भी रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना रोक सकता है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों को एक साथ कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी भी समझौते के साथ ठोस सुरक्षा गारंटी जरूरी है।
चुनाव कराने के लिए 60 दिन के युद्धविराम की मांग
जेलेंस्की ने कहा है कि यदि ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में चुनाव चाहते हैं, तो रूस को 60 दिनों तक युद्ध रोकना होगा। उनके मुताबिक, पूर्ण युद्धविराम लागू होने पर यूक्रेन चुनाव कराने की तैयारी कर सकता है।
11 अक्टूबर को ABC न्यूज को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि देश का अगला नेता कौन होगा, इसका फैसला यूक्रेन की जनता करेगी।
उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद लागू किए गए मार्शल लॉ के कारण फिलहाल चुनाव कराना संभव नहीं है। युद्ध के बीच चुनाव कराने की सुरक्षा और कानूनी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हैं।
जेलेंस्की ने पुतिन को रोकने की चुनौती पर उठाए सवाल
जेलेंस्की ने कहा कि कुछ नेता युद्ध जारी रहने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि असल चुनौती रूसी राष्ट्रपति पुतिन को रोकने की है। उनके अनुसार, दूसरों पर दबाव बनाना आसान हो सकता है, लेकिन पुतिन को युद्ध रोकने के लिए तैयार करना ज्यादा मुश्किल है।
उन्होंने अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए यूक्रेन के हमलों को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों पर भी असहमति जताई। जेलेंस्की ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी बाधाओं को भी ईंधन बाजार पर दबाव की वजह बताया।
अमेरिका और यूरोप से मदद की उम्मीद
जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन मिलकर रूस पर दबाव बनाने की कोशिश जारी रखेंगे। उन्होंने अमेरिकी मदद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यूक्रेन अपनी आजादी और संप्रभुता की रक्षा करता रहेगा।
फिलहाल ट्रम्प के सीजफायर संबंधी दावे पर रूस और यूक्रेन की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा समझौते की वास्तविक शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। यदि ऊर्जा ठिकानों पर हमले वास्तव में रुकते हैं, तो इसे युद्ध के दौरान तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।