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Russia UK Tension: यूक्रेन को हथियार देने पर रूस ने ब्रिटेन को घेरा, ब्रिटिश राजनयिक तलब
 

 

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर मॉस्को और लंदन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। 18 सितंबर 2026 को रूस के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन की चार्ज डी अफेयर्स डाना धोलाकिया को मॉस्को में तलब किया। रूस ने यूक्रेन को ब्रिटेन की ओर से लगातार सैन्य सहायता दिए जाने पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। 

रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ब्रिटेन की ओर से यूक्रेन को हथियारों और मानवरहित विमानों (UAVs) की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। मॉस्को ने इसे संघर्ष को लंबा खींचने वाली नीति बताया है। दूसरी ओर, ब्रिटेन का कहना है कि वह यूक्रेन की रक्षा के समर्थन में उसके साथ खड़ा है। (
रूस ने ब्रिटेन पर क्या आरोप लगाए?
रूसी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि लंदन की यूक्रेन नीति का उद्देश्य सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के बजाय उसे आगे बढ़ाना है। मॉस्को ने विशेष रूप से यूक्रेन को लंबी दूरी के हथियारों और अन्य सैन्य प्रणालियों की आपूर्ति का मुद्दा उठाया।

रूस का कहना है कि ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य सहायता यूक्रेन को रूसी क्षेत्र के खिलाफ हमले करने की क्षमता उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। रूसी पक्ष ने ब्रिटिश राजनयिक को अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से जुड़ी अपनी आपत्तियों की सूची भी सौंपने की बात कही है। 
यूक्रेन में ब्रिटिश सैन्य ठिकानों को लेकर चेतावनी
मॉस्को ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि वह आत्मरक्षा के अधिकार के तहत आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। रूस ने चेतावनी दी कि यूक्रेन में मौजूद ऐसी ब्रिटिश सैन्य सुविधाएं, जिनका इस्तेमाल रूसी क्षेत्र पर हमलों के लिए किया जाता है, उसके लिए वैध निशाना मानी जा सकती हैं।
यह बयान रूस और ब्रिटेन के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ाने वाला है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से रूस के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।

ब्रिटेन ने रूस के आरोपों पर क्या कहा?
ब्रिटिश विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने रूस की ओर से राजनयिक को तलब किए जाने को मॉस्को की ओर से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। ब्रिटेन ने कहा कि वह यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है और उसकी रक्षा के लिए जरूरी सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा। 
इस तरह दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। रूस पश्चिमी सैन्य सहायता को युद्ध को लंबा करने वाला कदम बताता है, जबकि ब्रिटेन इसे यूक्रेन की रक्षा के समर्थन के तौर पर पेश करता है।
पहले से तनावपूर्ण हैं रूस-ब्रिटेन के रिश्ते
रूस और ब्रिटेन के बीच राजनयिक संबंध पहले से ही बेहद तनावपूर्ण हैं। रूस के पूर्व राजदूत आंद्रेई केलिन के जुलाई में लंदन छोड़ने के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंधों को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। रूस ने हालांकि इस बात से इनकार किया था कि वह ब्रिटेन के साथ राजनयिक संबंधों का स्तर घटा रहा है। 
यूक्रेन युद्ध में ब्रिटेन की लगातार भूमिका और रूस के खिलाफ उसके रुख के कारण दोनों देशों के बीच विवाद के मुद्दे बढ़ते रहे हैं। ऐसे में ब्रिटिश राजनयिक को मॉस्को में तलब किया जाना इसी व्यापक तनाव की एक नई कड़ी माना जा रहा है।