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Russia Sanctions Bill: अमेरिका में रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल पास, भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ
 

 

अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक व्यापक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस की अर्थव्यवस्था और अधिकारियों पर प्रतिबंध कड़े करने के साथ उन देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जो रूस से तेल या गैस खरीदते हैं। ऐसे देशों के आयात पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ नाम के इस विधेयक को बुधवार को 262-159 वोट से सदन की मंजूरी मिली। इससे पहले अगस्त में अमेरिकी सीनेट भी इसे 86-11 वोट से पारित कर चुकी है। अब विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है।

रूस की ऊर्जा और रक्षा व्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव
इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और उसके रणनीतिक क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाना है। बिल में रूस के अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंधों के अलावा उसकी ऊर्जा और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों को भी निशाना बनाने के प्रावधान शामिल हैं।
विधेयक के समर्थकों का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल ने बिल के पारित होने पर इसे रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
भारत और चीन पर क्यों पड़ सकता है असर?
बिल का एक अहम प्रावधान रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों से जुड़ा है। कानून बनने की स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों के कुछ सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

भारत और चीन रूस से तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं। ऐसे में इस प्रावधान के लागू होने पर दोनों देशों से अमेरिका को होने वाले आयात पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, टैरिफ लगाया जाएगा या नहीं और किन देशों अथवा उत्पादों को इसके दायरे में रखा जाएगा, यह राष्ट्रपति के फैसले और कानून के तहत तय होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
लिंडसे ग्राहम के नाम पर है बिल
इस विधेयक का नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम ने रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े इस प्रयास पर एक साल से अधिक समय तक काम किया था।

बिल के समर्थकों का तर्क है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत की संभावनाओं को मजबूत किया जा सकता है। अब सभी की नजर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर है, क्योंकि उनके हस्ताक्षर के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा।