ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खदानों की तलाश पर खर्च हुए 13 हजार करोड़ रुपये, वीडियो में जाने भारत को मिल सकता है नया सप्लायर
ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खदानें खोजने की होड़ तेज हो गई है। देश में एक साल के दौरान सोने की खोज पर रिकॉर्ड करीब 13 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस अभियान को ‘गोल्ड रश’ कहा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में सोने के विशाल भंडार को देखते हुए आने वाले समय में यह भारत के लिए सोने का एक अहम सप्लायर बन सकता है। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है और कुल आयात में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी करीब 2.27 प्रतिशत बताई जाती है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा निवेश
सोने की खोज के लिए ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी हिस्से में सबसे ज्यादा खर्च किया गया है। यहां अकेले करीब 10,625 करोड़ रुपये नई खदानों की तलाश में लगाए गए। सोने के भंडार का पता लगाने के लिए बड़े स्तर पर ड्रिलिंग की जा रही है। इसके चलते ड्रिलिंग मशीनों और उनसे जुड़े उपकरणों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
खनन कंपनियां नए भंडार खोजने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। सोने की कीमतों और वैश्विक मांग के बीच नई खदानों की खोज को उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उतनी ही मात्रा में नया सोना मिलना तय है। वास्तविक उत्पादन इस बात पर निर्भर करेगा कि खोज के दौरान कितने आर्थिक रूप से उपयोगी भंडार सामने आते हैं।
दुनिया के कुल सोना संसाधनों का करीब 20% होने का अनुमान
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में करीब 13 हजार टन सोना मौजूद होने का अनुमान है। यह दुनिया के कुल सोना संसाधनों का लगभग 20 प्रतिशत बताया जाता है। इतने बड़े संभावित भंडार के कारण ऑस्ट्रेलिया वैश्विक सोना उद्योग के लिए महत्वपूर्ण देश बना हुआ है।नई खदानों की खोज सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में वहां सोने का उत्पादन बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, किसी देश में मौजूद अनुमानित संसाधनों और वास्तव में खनन के जरिए निकाले जा सकने वाले सोने की मात्रा में अंतर होता है।
भारत के लिए क्यों अहम है ऑस्ट्रेलिया?
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है। सोने के आभूषणों की वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई जाती है। देश में सोने का घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण मांग पूरी करने के लिए विदेशों से बड़ी मात्रा में सोना खरीदना पड़ता है।
आयात पर निर्भरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों और आपूर्ति में होने वाले बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया में नए भंडार मिलने और उत्पादन बढ़ने से भारत के लिए आपूर्ति के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।फिलहाल कुल भारतीय सोना आयात में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी करीब 2.27 प्रतिशत है। यदि भविष्य में वहां उत्पादन बढ़ता है और भारत के साथ व्यापारिक आपूर्ति मजबूत होती है, तो यह हिस्सेदारी बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए उत्पादन लागत, सोने की गुणवत्ता, व्यापारिक समझौतों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होंगे।
2026 की पहली तिमाही में भारत ने कितना सोना खरीदा?
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत ने करीब 1.61 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात किया। यह आंकड़ा भारतीय बाजार में सोने की बड़ी मांग और विदेशों पर निर्भरता को दर्शाता है।कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता निवेश भारत के लिए भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया भारत का बड़ा सप्लायर बनेगा या नहीं, यह नई खदानों से मिलने वाले सोने, उत्पादन में बढ़ोतरी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर निर्भर करेगा।