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नीदरलैंड में नया इतिहास: रॉब जेटन बने सबसे युवा और पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री

 

यूरोप के देश नीदरलैंड ने राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 38 वर्षीय रॉब जेटन देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इसके साथ ही वह नीदरलैंड के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी समलैंगिक पहचान को स्वीकार किया है। उनका शपथ ग्रहण समारोह शाही महल में राजा विलेम-अलेक्जेंडर द्वारा सम्पन्न कराया जाएगा।

रॉब जेटन की यह जीत केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और विविधता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान सकारात्मक राजनीति और उदार मूल्यों पर जोर दिया। जेटन ने कहा कि देश को विभाजन की राजनीति से आगे बढ़ाकर सहयोग और समावेशन की राह पर ले जाना जरूरी है।

चुनावी परिदृश्य और जीत की कहानी

हाल ही में हुए आम चुनाव में जेटन की पार्टी डेमोक्रेट्स 66 (D66) ने कड़ा मुकाबला किया। उन्होंने दक्षिणपंथी नेता गीर्त विल्डर्स की पार्टी पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) को पीछे छोड़ते हुए सरकार बनाने का अवसर हासिल किया। हालांकि संसद में पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण उन्हें गठबंधन सरकार का सहारा लेना पड़ा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव नीदरलैंड की राजनीति में वैचारिक संघर्ष का प्रतीक था। एक ओर राष्ट्रवादी और सख्त आप्रवासन नीति की वकालत करने वाली ताकतें थीं, तो दूसरी ओर उदार और यूरोप समर्थक दल। जेटन ने अपने अभियान में कहा था कि “सकारात्मक राजनीति से भी चुनाव जीते जा सकते हैं।”

सरकार की प्राथमिकताएँ

नई सरकार की प्राथमिकताओं में यूरोपीय संघ के साथ मजबूत संबंध, आर्थिक स्थिरता और रक्षा क्षेत्र में निवेश शामिल हैं। यूक्रेन संकट के संदर्भ में भी नीदरलैंड की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जेटन ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता देगा।

इसके साथ ही आप्रवासन नीति पर सख्ती और सामाजिक कल्याण योजनाओं में संतुलन बनाने की भी बात कही गई है। हालांकि उनकी सरकार को संसद में समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी दलों के साथ संवाद और समझौते करने होंगे।

सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक क्षण

रॉब जेटन का प्रधानमंत्री बनना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि LGBTQ+ समुदाय के लिए भी प्रेरणादायक घटना है। यूरोप में पहले भी कई नेता अपनी लैंगिक पहचान को खुलकर स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन नीदरलैंड में यह पहली बार है जब कोई खुले तौर पर समलैंगिक नेता देश की सर्वोच्च कार्यकारी जिम्मेदारी संभाल रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह कदम दर्शाता है कि नीदरलैंड सामाजिक समानता और विविधता के मामले में आगे बढ़ रहा है। युवा नेतृत्व और नई सोच के साथ जेटन से देश में ताज़गी और बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

आगे की राह

हालांकि चुनौतियाँ कम नहीं हैं—आर्थिक दबाव, आप्रवासन बहस और वैश्विक अस्थिरता—लेकिन जेटन का उदय एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने वादों को किस हद तक जमीन पर उतार पाते हैं।

नीदरलैंड में यह बदलाव न केवल राजनीतिक इतिहास में दर्ज होगा, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक के रूप में भी याद किया जाएगा।