‘चीन-उत्तर कोरियाई सीमा’ पर स्थित ‘लाल इमारत’ पर हुआ बड़ा खुलासा, देखें सैटेलाइट फोटोज्
अमेरिका के साथ शांति वार्ता करने के लिए बेशक ही उत्तर कोरिया ने परमाणु परिक्षणों को रोकने और परमामउ निरस्त्रीकरण का वादा किया हो। लेकिन अमेरिकी प्रशासन अभी भी उत्तर कोरिया के इस कदम पर निश्चिंत नही है। जिसकी बड़ी वजह चीन-उत्तर कोरिया पर स्थित लाल इमारत की सैटेलाइट फोटोज का सामने आना है। इन सैटेलाइट फोटोज को लेकर विशेषज्ञों ने एक बार फिर उत्तर कोरिया के साथ शांति वार्ता करने के फैसले पर आगाह कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि लाल इमारत की सेटेलाइट फोटोज उस समय कैप्चर की गईं जब अमरीकी खुफिया एजैंसी CIA के डायरैक्टर माइक पोंपियो उत्तर कोरिया की एतिहासिक और गोपनीय यात्रा पर गए थे। लाल रंग की यह इमारत चीन औऱ उत्तर कोरियाई यालू नदी के तट पर स्थित है। यालू नदीं दोनों देश की सीमाओं के बीचों-बीच बहती है जिस पर दोनों देसों को जोड़ने वाला चोंग्सू पुल भी निर्मित है।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक मुद्दों को लेकर अनबन काफी समय से जारी है। वहीं उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण पर राजी होना भी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इसलिए नदी के किनारे स्थित इस कंस्ट्रक्शन साइट को लेकर अमरीकी विशेषज्ञों ने कई प्रकार की साभावनाएं जताई हैं। उन्होंने सैटेलाइट इमेज को आधार बनाते हुए बताया कि उत्तर कोरिया के अधिकारियों को सीमा पार जाते हुए देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक “उत्तर कोरिया स्थित चोंग्सू में एक लाल छत वाली इमारत को देखा गया है। जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह लाल इमारत एक फैक्ट्री है जो अवैध तरीके से अतिशुद्ध रूप के ग्रेफाइट का निर्माण करती है। उत्तर कोरिया के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि ग्रेफाइट का इस्तेमाल न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने में आवश्यक होता है।”
“वह न्यूक्लियर ग्रेड वाले ग्रेफाइट का निर्माण उत्तर कोरिया को कई फायदे दिला रहा है। दूसरे देशों में भी इसका बड़े स्तर पर निर्यात किया जा रहा है।” – रिपोर्टस्
फिल्हाल, अमेरिकी खुफिया एंजेसी सीआईए ने भी इस इमारत को लेकर कोई खास पुष्टि या जानकारियां साझा नहीं की है, लेकिन अमेरिका प्रशासन ने इस इमारत को शक के दायरे में रखा है। यह मामले उस समय सामने आया, जब किम जोंग उन अचानक मिसाइल और परमाणु परिक्षणों की रोकथाम के लिए तैयार हो गया। बता दें कि अमेरिका और कई सहयोगी देशों ने उत्तर कोरिया की इस पहल का स्वागत किया है। जहां एक तरफ जापान को उत्तर कोरिया पर संदेह है, उसी प्रकार अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है।\
इस मामले में अमरीकी हथियार विशेषज्ञ इंटरनैशनल सिक्योरिटी स्टडीज के रॉबर्ट लिटवॉक का मानना है कि “अमेरिका को इस मामले में संभलकर अगला कदम रखने की सख्त आवश्यकता है क्योंकि उत्तर कोरिया का इतिहास अभी भी ठीक नहीं है। उत्तर कोरिया अपनी आदतों के लिए गवाह है कि उसकी बातों पर विश्वास करना कभी भी सही नहीं रहा है।”
“किम जोंग की परिवारिर पृष्ठभूमि और पहले के व्यवहार को देखकर विश्वास किया जा सकता है लेकिन संभलने की सख्त जरूरत है।”-रॉबर्ट लिटवॉक