पुतिन की यूरोप को सीधी धमकी: 'हम युद्ध के लिए तैयार, लेकिन परमाणु संघर्ष में कोई विजेता नहीं बचेगा'
रूस और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रूस हर परिस्थिति में यूरोप के साथ युद्ध के लिए तैयार है, लेकिन मॉस्को ऐसा कोई युद्ध नहीं चाहता। पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि हालात बिगड़ते हैं और संघर्ष छिड़ता है, तो इसमें किसी भी पक्ष की जीत नहीं होगी और सभी को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की किसी भी पहल का स्वागत करेगा। उनके मुताबिक, यदि यूरोपीय देश बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं, तो रूस सहयोग करने के लिए तैयार है।
पुतिन ने कहा- रूस पूरी ताकत से जवाब देगा
पुतिन ने यूरोपीय देशों को बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के किसी भी कदम को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या यूरोपीय देश उत्तरी यूरोप में भी इसी तरह का टकराव मोल लेना चाहते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि रूस के समुद्री परिवहन या उसके हितों को निशाना बनाया गया, तो मॉस्को इसका कड़ा जवाब दे सकता है। पुतिन के इस बयान से यूरोप में रूस के साथ संभावित सैन्य टकराव को लेकर चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
'युद्ध हुआ तो कोई विजेता नहीं होगा'
पुतिन ने अपने बयान में युद्ध के विनाशकारी परिणामों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रूस यूरोप के साथ संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन यदि परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, तो किसी भी पक्ष को जीत हासिल नहीं होगी।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप के साथ संवाद बहाल करने के प्रयासों का मॉस्को समर्थन करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन को यूरोपीय देशों और नाटो की ओर से मिल रही सहायता के कारण रूस और पश्चिमी देशों के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।
पुतिन से बातचीत को लेकर यूरोप में मतभेद
रूस के राष्ट्रपति के साथ बातचीत और तनाव कम करने की संभावनाओं को लेकर यूरोपीय देशों के बीच भी अलग-अलग विचार सामने आए हैं। कुछ देशों में रूसी नेतृत्व के साथ सीधे संवाद को लेकर आलोचना हुई है, जबकि दूसरे पक्ष का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक बातचीत जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्वे के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और फिनलैंड के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोन ने पुतिन के साथ बातचीत में यूरोप के साथ तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यूक्रेन के समर्थन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी टकराव की आशंका
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। यूरोपीय देशों की ओर से यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता दिए जाने पर मॉस्को कई बार आपत्ति जता चुका है। रूस पहले भी नाटो की गतिविधियों और यूक्रेन को मिल रहे समर्थन को लेकर चेतावनी देता रहा है।
ऐसे में पुतिन का ताजा बयान यूरोप और रूस के बीच जारी तनाव को लेकर अहम माना जा रहा है। हालांकि, युद्ध की आशंका के बीच रूसी राष्ट्रपति ने बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात भी कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या टकराव और बढ़ता है।