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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 साल बाद नीदरलैंड दौरे पर, फुटेज में देखें पीएम रॉब जेटेन ने किया स्वागत, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर पर बनी सहमति

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर नीदरलैंड के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे हैं। यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच इस दौरे से दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 15 मई से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे। इस दौरान उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा और कई उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन किया गया है। सबसे अहम मुलाकात नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ प्रस्तावित है, जिसमें दोनों नेता विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

इस दौरे में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत और नीदरलैंड के बीच लंबे समय से आर्थिक साझेदारी रही है, लेकिन अब दोनों देश इसे नए क्षेत्रों में विस्तारित करना चाहते हैं। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और डिजिटल इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत होने की उम्मीद है।

इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस सेमीकंडक्टर सेक्टर माना जा रहा है। भारत वर्तमान समय में अपनी चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी स्थिति मजबूत हो सके। नीदरलैंड इस क्षेत्र में पहले से ही एक अग्रणी देश माना जाता है, खासकर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और उपकरण निर्माण के मामले में। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति दे सकता है।

इसके अलावा वाटर मैनेजमेंट भी इस दौरे का एक महत्वपूर्ण विषय है। नीदरलैंड अपनी आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों और बाढ़ नियंत्रण प्रणालियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। भारत, जो कई क्षेत्रों में जल संकट और बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना करता है, नीदरलैंड की तकनीक और अनुभव से काफी लाभ उठा सकता है।

ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट चेंज पर भी दोनों देशों के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित कर चुका है। ऐसे में नीदरलैंड के साथ साझेदारी इस दिशा में सहयोग को और मजबूत कर सकती है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी इस दौरे के एजेंडे में शामिल है। बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर विचार करेंगे।