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'शांति का दिखावा और जंग की तैयारी...' अमेरिका पर ईरान का तीखा वार, दोहरी रणनीति पर निकाली भड़ास 

 

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ़ ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ़ तो अमेरिका शांति की वकालत करने और युद्ध खत्म करने की बात करने का दिखावा करता है, वहीं दूसरी तरफ़ वह मध्य पूर्व में नए सैन्य हथियार भेज रहा है। घालीबाफ़ ने ज़ोर देकर कहा कि शांति वार्ता को तभी विश्वसनीय माना जाएगा जब अमेरिका के काम उसकी बातों के अनुरूप हों।

'X' पर लिखते हुए, घालीबाफ़ ने कहा कि जहाँ अमेरिका दुनिया को शांति का संदेश दे रहा है, वहीं ज़मीनी स्तर पर नए सैन्य उपकरण तैनात कर रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि अमेरिका गलतफहमी में है कि ईरान उसकी रणनीति को समझ नहीं पा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है; ईरान ने इस चाल को पहचान लिया है और उसी के अनुसार तैयारी की है। उनके अनुसार, किसी भी देश के इरादे उसके बयानों से नहीं, बल्कि उसके कामों से तय होते हैं। अगर अमेरिका सचमुच तनाव कम करना चाहता है, तो उसके कामों में यह इरादा दिखना चाहिए।

घालीबाफ़ का यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बने तनाव के बीच आया है। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया है कि मध्यस्थों ने दोनों देशों के सामने दस दिन के संघर्ष-विराम का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद एक अंतरिम समझौते को फिर से शुरू करने की संभावना तलाशना है। हालाँकि, दोनों पक्षों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।

इस बीच, ज़मीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में हमले हुए हैं। होर्मोज़गन प्रांत जैसे क्षेत्रों में तेल सुविधाओं, हवाई अड्डों और रेलवे नेटवर्क सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों को निशाना बनाया गया है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया हमलों से पिछले हमलों की तुलना में ज़्यादा नुकसान हुआ है।

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर देश बात नहीं मानता है, तो उसके ऊर्जा बुनियादी ढाँचे - खासकर कच्चे तेल की सुविधाओं - को निशाना बनाया जा सकता है। इस तरह, जहाँ एक तरफ़ टकराव को रोकने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के कोई तत्काल संकेत नहीं दिख रहे हैं।