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मोदी-पुतिन की 45 मिनट की मुलाकात, वीडियो में जाने भारत को रूस से मिल सकता है सुखोई-57 फाइटर जेट का तोहफा; कई बड़े समझौतों पर नजर

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक चली इस बातचीत में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने, रक्षा सहयोग समेत कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन पहुंचे, जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियों का जायजा लिया।बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि मुलाकात में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

रक्षा क्षेत्र में बड़ी डील की संभावना

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भारत और रूस के बीच इस बैठक को रक्षा सहयोग के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच बड़ी रक्षा डील की संभावनाएं हैं। चर्चा है कि भारत रूस सेअत्याधुनिक सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर सकता है। यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे स्टील्थ तकनीक यानी रडार की पकड़ से बचने की क्षमता के लिए जाना जाता है।अगर यह सौदा आगे बढ़ता है तो भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हो सकता है। रूस पहले से ही भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच मिसाइल, लड़ाकू विमान, पनडुब्बी और सैन्य तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग जारी है।

उद्योग और व्यापार बढ़ाने पर भी फोकस

मोदी-पुतिन वार्ता में केवल रक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने पर भी जोर रहने की संभावना है। दोनों देश उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।इसके अलावा भारतीय कंपनियों को रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत रूस के साथ नए निवेश और तकनीकी सहयोग के रास्ते तलाश रहा है।

परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा

सूत्रों के मुताबिक बैठक में परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), कुशल कामगारों और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। रूस भारत के लिए ऊर्जा और कच्चे माल का एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।यूक्रेन युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस लगातार अपने द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा और ऊर्जा के अलावा अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत-रूस रिश्तों के लिए अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए रूस समेत सभी प्रमुख देशों के साथ संबंध मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस बैठक से जुड़े कई बड़े फैसलों और समझौतों का खुलासा हो सकता है। रक्षा सौदे से लेकर आर्थिक साझेदारी तक, मोदी-पुतिन की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।