Paraguay Crisis: बैंक डूबने के बाद राष्ट्रपति सैंटियागो पेना की कुर्सी गई, 44 सांसदों ने हटाने के पक्ष में किया मतदान
दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में एक बड़े बैंक के वित्तीय संकट ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। देश के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को शुक्रवार को पद से हटा दिया गया। सीनेट के सभी 44 सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने के पक्ष में मतदान किया। फिलहाल पेना को उनके घर में ही नजरबंद रखा गया है। उन पर राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल करते हुए सरकारी धन को एक निजी बैंक में जमा कराने और कथित अनियमितताओं को संरक्षण देने के आरोप हैं।
यह पूरा विवाद देश के बड़े बैंक यूएनो के संकट से जुड़ा है। बैंक को डूबने से बचाने में नाकाम रहने और उसके कामकाज में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर सवाल उठे। बैंक के संकट से करीब 30 लाख ग्राहक प्रभावित हुए हैं। तीन दिन पहले नियामक एजेंसियों ने बैंक को अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद ग्राहकों के खाते और बैंक कार्ड से लेनदेन प्रभावित हो गया।
जांच पूरी होने तक घर में नजरबंद रहेंगे पेना
राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के बाद पेना को घर में ही हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है। उन्हें आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार विरोधी इकाई के सामने पेश किए जाने तक घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
सांसदों ने आरोप लगाया कि पेना ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके सरकारी धन के सैकड़ों मिलियन डॉलर यूएनो बैंक में जमा करवाए। आरोप है कि बैंक ने जोखिम भरे इनसाइडर लोन दिए, लेकिन नियामक एजेंसियों ने समय रहते इन पर कार्रवाई नहीं की।
इस मामले में पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो की गिरफ्तारी के निर्देश भी दिए गए हैं। कार्वालो को पेना ने ही नियुक्त किया था। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
उपराष्ट्रपति पेद्रो अलीआना बने नए राष्ट्रपति
पेना को पद से हटाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति पेद्रो अलीआना ने शुक्रवार को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। वे अगस्त 2028 तक बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेंगे।
52 वर्षीय अलीआना लंबे समय से सत्ता में रही कंजर्वेटिव कोलोराडो पार्टी के नेता हैं। वे दक्षिणी प्रांत ञीम्बुकू के पूर्व गवर्नर और देश के निचले सदन के पूर्व स्पीकर भी रह चुके हैं।
नए राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक के प्रभावित ग्राहकों को उनकी जमा पूंजी लौटाना और बैंक के संकट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
राजनीतिक गुरु ने ही पेना से बनाई दूरी
यूएनो बैंक के संकट ने पैराग्वे को एक दशक से अधिक समय के सबसे बड़े राजनीतिक संकट में धकेल दिया है। मंगलवार को नियामक एजेंसियों ने बैंक को अपने नियंत्रण में लिया था। इसके बाद पेना ने इस्तीफे की पेशकश की। उनकी अपनी पार्टी भी उनके खिलाफ हो गई और सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया।
विरोध की अगुआई पूर्व राष्ट्रपति और कोलोराडो पार्टी के प्रमुख होरासियो कार्तेस ने की। कार्तेस को पेना का राजनीतिक गुरु माना जाता है। उन्होंने ही पेना को वित्त मंत्री बनाया था और राष्ट्रपति पद के लिए उनका समर्थन किया था। हालांकि, राष्ट्रपति बनने के बाद पेना ने अपना अलग राजनीतिक आधार तैयार करना शुरू कर दिया था।
सरकारी धन से तेजी से बढ़ा यूएनो बैंक
यूएनो कुछ ही वर्षों में पैराग्वे का पांचवां सबसे बड़ा बैंक बन गया था। बैंक में 80 करोड़ डॉलर से अधिक सरकारी धन जमा था। सांसदों का आरोप है कि पेना ने सरकारी पेंशन फंड के 35.5 करोड़ डॉलर बैंक में जमा कराए, जो निर्धारित कानूनी सीमा से ज्यादा थे।
पेना पर यूएनो की होल्डिंग कंपनी में हिस्सेदारी रखने और बैंक के एक पूर्व अधिकारी को केंद्रीय बैंक का प्रमुख नियुक्त करने के आरोप भी लगे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, बैंक के राजनीतिक संबंधों के कारण उसे नियामक जांच में ढील मिली हो सकती है।
30 लाख ग्राहकों की जमा पूंजी पर संकट
बैंक पर कार्रवाई के बाद ग्राहक अपने खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे थे। बैंक कार्ड से खरीदारी और अन्य लेनदेन भी प्रभावित हुए। यूएनो के अनुसार, 10 लाख से अधिक लोगों ने इसी बैंक में अपना पहला खाता खोला था।
गुरुवार से उन ग्राहकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिनके खातों में 1 करोड़ गुआरानी यानी करीब 1,600 डॉलर तक जमा हैं। बैंक में जमा करीब 37 हजार डॉलर तक की राशि का बीमा है।
बैंक मालिक समेत 27 लोगों पर मुकदमा
बैंक के नियंत्रक शेयरधारक मिगेल वास्केज समेत 27 लोगों के खिलाफ विश्वासघात और धोखाधड़ी की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। बैंक के छह निदेशक हिरासत में हैं।
जांच एजेंसियों ने वास्केज के घर से नौ लग्जरी कारें, एक यॉट और एक छोटा विमान जब्त किया है। अब जांच का केंद्र बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ सरकारी धन के इस्तेमाल और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका भी है।
यूएनो बैंक का संकट अब केवल वित्तीय मामला नहीं रह गया है। इसने पैराग्वे की सत्ता और राजनीतिक व्यवस्था को भी हिला दिया है। नए राष्ट्रपति के सामने बैंकिंग व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और ग्राहकों का पैसा सुरक्षित लौटाने की बड़ी जिम्मेदारी है।