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भारत से तनाव में मौका देख रहे बागी, टूटने को पाकिस्तान...हर ओर बगावत

 

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने पड़ोसी मुल्क के अंदर लंबे समय से दबे असंतोष और अलगाववादी आंदोलनों को हवा दे दी है। बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में बगावती सुर एक बार फिर तेज हो गए हैं। राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और सेना के अत्याचारों से त्रस्त जनता अब खुलेआम विद्रोह कर रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वह उसे टूटने की ओर ले जा सकता है।

बलूचिस्तान में बगावत कोई नई बात नहीं है। दशकों से वहां के लोग पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में बलूच विद्रोही संगठनों ने हमलों की तीव्रता और दायरा दोनों बढ़ा दिए हैं। पाकिस्तानी सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन और सामूहिक कब्रों के आरोप लग रहे हैं, जिससे स्थानीय जनता में आक्रोश और बढ़ा है।

सिंध प्रांत में भी 'सिंधी राष्ट्रवाद' एक बार फिर उभरता दिख रहा है। कई संगठनों ने खुलकर पाकिस्तान की संघीय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और स्थानीय स्वायत्तता की मांग तेज कर दी है। इसी तरह खैबर पख्तूनख्वा में भी पश्तून आंदोलन दोबारा सक्रिय हो गया है। ‘पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट’ (PTM) लगातार पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रहा है।

इन सबके बीच भारत के साथ सीमा पर तनाव की स्थिति पाकिस्तान के लिए दोहरी चुनौती बन गई है। सेना जहां एक ओर सीमा पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश के अंदर बगावत को दबाने में नाकाम साबित हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत से तनाव की आड़ में पाकिस्तानी हुकूमत देश के अंदर के विद्रोह को नजरअंदाज कर रही है।

इस पूरे परिदृश्य पर प्रतिक्रिया देते हुए एक अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक ने कहा, "पाकिस्तान एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां उसकी एकता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अगर सरकार और सेना ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में देश के टुकड़े होना तय है।"

दूसरी ओर, भारत की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है।

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। वहां के आम नागरिक, खासकर अल्पसंख्यक और गैर-पंजाबी समुदाय, खुद को उपेक्षित और पीड़ित महसूस कर रहे हैं। इस स्थिति में यदि कोई बाहरी या अंतरराष्ट्रीय समर्थन इन विद्रोही संगठनों को मिलता है, तो पाकिस्तान की अखंडता को बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

निष्कर्षतः, भारत से तनाव का फायदा उठाकर पाकिस्तान के भीतर बागी ताकतें एकजुट हो रही हैं, और यह देश अब वाकई "टूटने की कगार" पर आ खड़ा हुआ है।