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ना नींद... ना चैन... आधी रात में उड़ी Pakistan की नींद, पीएम मोदी ने लिया यह बड़ा फेसला

 

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान में हलचल मच गई है। यही वजह है कि पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने देर रात करीब डेढ़ बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि हमें विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली है, जो संकेत देती है कि भारत अगले 24 से 36 घंटों में सैन्य हमला कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए सेनाओं को खुली छूट दे दी। ताकि वे पहलगाम हमले के अपराधियों और उनके साथियों को दंडित कर सकें। इस आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई।

पहलगाम हमले के बाद चारधाम यात्रा को लेकर अलर्ट

तरार ने खिलखिलाकर हंसी

तरार ने कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद का शिकार रहा है और वह इस संकट की पीड़ा को समझता है। हमने हमेशा विश्व में इसकी निंदा की है। तरार ने कहा कि पाकिस्तान ने सच्चाई का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों के एक तटस्थ आयोग द्वारा विश्वसनीय, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की पूरी तरह से पेशकश की है। पाकिस्तानी मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी स्थिति की गंभीरता को समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हम हर कीमत पर पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा- हम हाई अलर्ट पर हैं

रॉयटर्स के अनुसार, इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि पाकिस्तान हाई अलर्ट पर है, लेकिन वह अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल तभी करेगा जब देश के अस्तित्व को सीधा खतरा होगा।

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए

बता दें कि 22 अप्रैल को हुई आतंकी घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को कहा था कि भारत पहलगाम नरसंहार में शामिल हर आतंकवादी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उनका पता लगाएगा और उन्हें सजा देगा तथा हत्यारों का दुनिया के हर कोने तक पीछा करेगा। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक हमले तेज कर दिए हैं। भारत ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया, सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया तथा अटारी-वाघा सीमा को बंद कर दिया।