×

पाकिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके, बलूचिस्तान रहा केंद्र

 

पाकिस्तान में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप सोमवार दोपहर 1 बजकर 26 मिनट पर आया जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.6 मापी गई। राहत की बात यह रही कि इस बार किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

भूकंप का केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में था और इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी। भूकंप का अक्षांश 29.12 उत्तर और देशांतर 67.26 पूर्व रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह भूकंप मध्यम तीव्रता का था, लेकिन इसकी समयावधि और गहराई के कारण कई इलाकों में कंपन महसूस किया गया।

पाकिस्तान में हाल के दिनों में भूकंप की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे पहले 5 मई को भी पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में दोपहर 4 बजे के आसपास भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता 4.2 थी और इसका केंद्र 36.60 डिग्री उत्तर अक्षांश तथा 72.89 डिग्री पूर्व देशांतर पर था। उस घटना में भी भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी और झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए थे।

इतना ही नहीं, 12 अप्रैल को भी पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस बार भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गई थी और उसके झटके भारत के जम्मू-कश्मीर में भी दर्ज किए गए थे। इससे साफ है कि पाकिस्तान भूकंप संभावित क्षेत्र में स्थित है और यहां आए दिन धरती की सतह के नीचे हलचल दर्ज की जाती है।

पाकिस्तान को भूकंप के कारण सबसे बड़ा झटका 8 अक्टूबर 2005 को लगा था, जब सुबह 8:50 बजे 7.6 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसका केंद्र पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद में था। इस भयानक आपदा में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर भारी तबाही हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक इस भूकंप में 80,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा बताई गई थी। इसके अलावा लाखों लोग बेघर हो गए थे और वर्षों तक उस भूकंप के प्रभावों से उबरने की कोशिश करते रहे।

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि पाकिस्तान के कई हिस्से विशेष रूप से भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हैं। लगातार भूकंपीय गतिविधियाँ यह संकेत देती हैं कि भविष्य में भी यहां गंभीर भूकंप आने की संभावना बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को आपदा प्रबंधन की तैयारी और जनजागरूकता को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।