पाकिस्तान बेनकाब! गाजा के नाम पर चंदा लेकर ISI की छत्रछाया में तैयार कर रहा आतंक की नयी फैक्ट्री
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का दोहरा रवैया एक बार फिर बेनकाब हो गया है। पिछले डेढ़ साल में, दर्जनों हमास आतंकवादी पाकिस्तान आए और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, ISI ने न केवल हमास नेतृत्व का गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि उनके और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बीच मजबूत तालमेल बनाने में भी मदद की।
इजरायली कार्रवाई के बाद हमास का नया ठिकाना
लगातार इजरायली हमलों के कारण हमास को भारी नुकसान हुआ है। संगठन कमजोर हो गया है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गाजा में फिर से पैर जमाने की उसकी कोशिशें नाकाम रही हैं, क्योंकि इजरायली सेना किसी भी नए ठिकाने को पनपने नहीं दे रही है। इस स्थिति में, हमास नेतृत्व ने ISI से संपर्क किया, और पाकिस्तान ने उन्हें सुरक्षित पनाह दी।
पाकिस्तान में ट्रेनिंग जारी
एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान में नए हमास लड़ाकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें विशेष उड़ानों से लाया जा रहा है, और LeT और JeM के कैडर भी ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे हैं। हमास को भरोसा है कि इजरायल पाकिस्तान में उसके ठिकानों पर हमला नहीं करेगा, इसलिए वहां बिना किसी डर के गतिविधियां की जा रही हैं।
यह भारत के लिए चिंता का विषय क्यों है?
भारतीय एजेंसियों का मानना है कि भले ही हमास सीधे भारत पर हमला न करे, लेकिन उसकी मौजूदगी एक गंभीर खतरा है। इसका कारण साफ है—हमास की तकनीकी और ऑपरेशनल क्षमताएं LeT और JeM से कहीं ज्यादा उन्नत मानी जाती हैं। ट्रेनिंग के दौरान, हमास इन संगठनों के साथ अपना अनुभव और आधुनिक हमले की रणनीतियां साझा कर रहा है, जिससे भविष्य में भारत के खिलाफ बड़े और ज्यादा खतरनाक हमलों की संभावना बढ़ रही है।
ऑपरेशन सिंदूर से आतंकी संगठन नाराज
भारत के ऑपरेशन सिंदूर में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को भारी नुकसान हुआ था। बहावलपुर में जैश का मुख्यालय नष्ट हो गया था, जबकि मुरीदके में LeT का सबसे बड़ा ट्रेनिंग सेंटर भी ध्वस्त कर दिया गया था। यह कार्रवाई पहलगाम हमले का बदला था, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई थी। अब दोनों संगठन खुद को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, और हमास के साथ यह गठबंधन उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
गाजा के नाम पर इकट्ठा किया गया फंड, आतंकवाद के लिए इस्तेमाल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा फंडिंग को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, ISI ने हमास के नाम पर गाजा के लिए फंड इकट्ठा किया। लेकिन यह पैसा हमास पर खर्च नहीं किया गया। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के तबाह हुए ठिकानों को फिर से बनाने के लिए लाखों रुपये का इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तान का पाखंड बेनकाब
पाकिस्तानी मामलों के जानकारों का कहना है कि इससे उसका असली चेहरा सामने आता है। एक तरफ वह शांति की बात करता है, और दूसरी तरफ आतंकवादियों को पनाह देता है। यही वजह है कि अमेरिका के नेतृत्व वाले "बोर्ड ऑफ पीस" में पाकिस्तान को शामिल करने के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जो देश हमास को पनाह दे रहा है, वह गाजा में शांति कैसे ला सकता है?