×

Pakistan Balochistan Crisis: बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों के बीच पूर्व अफगान सैनिकों की भर्ती का दावा, रिपोर्ट में 2 हजार का जिक्र
 

 

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में लगातार जारी हिंसा के बीच पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की कथित भर्ती का मामला सामने आया है। रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी (RFE/RL) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 2,000 पूर्व अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों को बलूचिस्तान में सुरक्षा अभियानों से जुड़े काम के लिए भर्ती किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसी किसी आधिकारिक भर्ती योजना की पुष्टि नहीं की है। 

पूर्व अफगान सैनिकों को कितनी रकम मिलने का दावा?
RFE/RL से बातचीत में एक पूर्व अफगान सैनिक ने बताया कि कुछ पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों को करीब 40,000 पाकिस्तानी रुपये मासिक भुगतान किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह रकम करीब 145 अमेरिकी डॉलर बताई गई है। भारतीय रुपये में इसकी कीमत विनिमय दर के हिसाब से बदल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती किए गए लोगों को उनके तैनाती वाले इलाकों के पुलिस थानों से जोड़ा जाता है। इससे उन्हें हथियार रखने और सुरक्षा चौकियों पर पहचान संबंधी दिक्कतों से बचने में मदद मिलती है। 

2021 के बाद मुश्किल में फंसे पूर्व अफगान सुरक्षाकर्मी
अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अफगानिस्तान की तत्कालीन सुरक्षा व्यवस्था बड़े बदलाव से गुजरी। पूर्व सरकार के सैनिकों और पुलिसकर्मियों की नौकरियां खत्म हो गईं और कई लोग सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान समेत दूसरे देशों में चले गए।
RFE/RL की रिपोर्ट में एक पूर्व अफगान सैनिक ने बताया कि पाकिस्तान आने के बाद कई पूर्व सुरक्षाकर्मियों के पास नियमित रोजगार नहीं था। इसी दौरान उन्हें बलूचिस्तान में सुरक्षा से जुड़े काम के प्रस्ताव मिलने लगे। 
पाकिस्तान को इन पूर्व सैनिकों से क्या फायदा हो सकता है?
पूर्व अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों को सैन्य प्रशिक्षण तथा सुरक्षा अभियानों का अनुभव रहा है। इनमें से कई लोगों ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अभियान में काम किया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऐसे लोगों को स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर उन्हें शुरुआती स्तर की ट्रेनिंग देने की जरूरत अपेक्षाकृत कम हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रूप से भर्ती किए गए सभी लोग किस संगठन या सुरक्षा ढांचे के तहत काम कर रहे हैं। 
बलूचिस्तान में क्यों बढ़ा सुरक्षा दबाव?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यहां लंबे समय से अलगाववादी हिंसा जारी है। बलूच अलगाववादी संगठन अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते हैं। इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सक्रिय रहा है। (
जुलाई 2026 में हिंसा का स्तर काफी बढ़ा। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) के अनुसार, उस महीने देशभर में सुरक्षा बलों के 112 सदस्य मारे गए और बलूचिस्तान में कुल मौतों का आंकड़ा 372 रहा। 
जुलाई की शुरुआत में बलूचिस्तान में कई बड़े हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान हुआ। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, 5 जुलाई के बाद हुए हमलों और उसके बाद के अभियानों में 38 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी। 
बलूच और TTP की गतिविधियां अलग-अलग
बलूचिस्तान में सक्रिय सभी विद्रोही संगठन एक जैसे नहीं हैं। बलूच अलगाववादी संगठन मुख्य रूप से क्षेत्रीय स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग से जुड़े हैं।
वहीं TTP पाकिस्तान में अपने विचार के अनुरूप इस्लामी शासन स्थापित करने की कोशिश करने वाला अलग संगठन है। RFE/RL के अनुसार, बलूच अलगाववादी समूह मुख्य रूप से बलूचिस्तान में सक्रिय हैं, जबकि TTP का पारंपरिक प्रभाव खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान से लगे इलाकों में रहा है। 
भर्ती की खबर पर पाकिस्तान ने नहीं की पुष्टि
पूर्व अफगान सैनिकों की कथित भर्ती का यह मामला फिलहाल मुख्य रूप से RFE/RL की रिपोर्ट में सामने आए सूत्रों और पूर्व सैनिकों के बयानों पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसी किसी संगठित भर्ती योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
यही वजह है कि 2,000 लोगों की संख्या और उनके कथित इस्तेमाल को फिलहाल पुष्ट सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं देखा जा सकता। अगर ऐसी भर्ती वास्तव में बड़े स्तर पर हुई है, तो इससे बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति और अफगानिस्तान से उसके संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।