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"होर्मुज से तेल और गैस की एक भी बूंद नहीं जाएगी....' US के तांडव के बाद अमेरिका की कड़ी चेतावनी 

 

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर खुला टकराव शुरू हो गया है और दुनिया पर तेल संकट का खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ, अमेरिका ने दुनिया में तेल व्यापार के लिए अहम समुद्री रास्ते, 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' पर नाकेबंदी कर दी है, तो दूसरी तरफ ईरान ने कसम खाई है कि यहाँ से तेल या गैस की एक बूंद भी नहीं गुज़रेगी। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि जब तक इस इलाके में अमेरिका की "बुरी हरकतें" जारी रहेंगी, तब तक वहाँ से "तेल या गैस की एक बूंद भी" एक्सपोर्ट नहीं की जाएगी।

IRGC ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अमेरिका के आक्रामक कदमों का नतीजा सिर्फ़ 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को दोबारा खोलने में देरी ही होगा। गौरतलब है कि 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' तेल और गैस के ट्रांसपोर्ट के लिए दुनिया का सबसे अहम और संकरा रास्ता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुज़रता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

**अमेरिका की नई पाबंदियों के बाद ईरान ने अमेरिकी समझौते से हाथ खींचा**

ईरान ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका के साथ हुए समझौते (MoU) से पूरी तरह पीछे हटने का ऐलान कर दिया है। ईरान का आरोप है कि वॉशिंगटन में ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने हुए उस समझौते का बार-बार उल्लंघन किया है, जिसका मकसद टकराव को टालना था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान अब खुद को युद्धविराम समझौते की शर्तों से बंधा हुआ नहीं मानता। उनका तर्क है कि अमेरिका ने न सिर्फ़ समझौते का उल्लंघन किया है, बल्कि उसे पूरी तरह खत्म कर दिया है - खासकर ईरानी बंदरगाहों पर नई नौसैनिक नाकेबंदी लगाकर।

यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिकी सेना ने बुधवार सुबह ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकेबंदी कर दी। यह कार्रवाई 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में की गई थी। इसके चलते कुवैत और बहरीन जैसे देशों पर नए हमले हुए हैं, जहाँ अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, और इससे टकराव खत्म करने के मकसद से किया गया अंतरिम समझौता और कमज़ोर पड़ गया है।

पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच हुई गोलीबारी से पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है। मौजूदा हालात को बड़े पैमाने पर युद्ध जैसा कहा जा सकता है; दोनों देश 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' पर कब्ज़ा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।