Nobel Prize 2026: साहित्य के नोबेल का आज ऐलान, अमिताव घोष समेत ये लेखक रेस में
साल 2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार के विजेता का इंतजार आज खत्म होने वाला है। स्वीडिश अकादमी भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे इस साल के विजेता के नाम की घोषणा करेगी। पुरस्कार की घोषणा से पहले अलग-अलग अनुमानों और बुकमेकर लिस्ट में चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे को मजबूत दावेदार बताया जा रहा है। वहीं भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में चर्चा में है।
भारत की ओर से अब तक सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें वर्ष 1913 में यह सम्मान प्रदान किया गया था और वह नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले पहले एशियाई भी बने थे।
चीन की कैन श्वे का नाम सबसे आगे
73 वर्षीय चीनी लेखिका कैन श्वे इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार की संभावित विजेताओं में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। उनका वास्तविक नाम डेंग शियाओहुआ है।
कैन श्वे का साहित्य पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से काफी अलग माना जाता है। उनकी रचनाओं में सपनों जैसे दृश्य, मनोवैज्ञानिक उलझनें और पात्रों की आंतरिक दुनिया प्रमुख रहती है। उनके लेखन की तुलना कई बार फ्रांज काफ्का और जॉर्ज लुइस बोर्खेस जैसे लेखकों से की गई है।
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘द लास्ट लवर’, ‘लव इन द न्यू मिलेनियम’ और ‘आई लिव इन द स्लम्स’ जैसी किताबें शामिल हैं।
अमिताव घोष भी संभावित नामों में
भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी इस साल साहित्य नोबेल के संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है। उनकी चर्चित किताब ‘सी ऑफ पॉपीज’ वर्ष 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट तक पहुंची थी।
घोष के साहित्य में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों को खास जगह मिली है। उनकी पुस्तक ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ में जलवायु परिवर्तन के मानवीय और सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
दक्षिण एशियाई साहित्य से जुड़े चर्चित नामों में सलमान रुश्दी, माइकल ओंडाट्जे और भारतीय मूल की मॉरीशस की लेखिका आनंदा देवी भी शामिल हैं।
Murakami से Atwood तक कई बड़े नाम चर्चा में
साहित्य नोबेल की संभावित सूची में जापान के मशहूर लेखक हारुकी मुराकामी का नाम भी लंबे समय से बना हुआ है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के जेराल्ड मर्नेन और अमेरिका के थॉमस पिंचन भी चर्चित नाम हैं।
मेक्सिको की क्रिस्टीना रिवेरा गार्सा, स्पेन के एनरिक विला-मातास, पुर्तगाल की लिडिया जॉर्ज, रूस की ल्यूडमिला उलित्स्काया, कनाडा की मार्गरेट एटवुड और फ्रांस के मिशेल ह्वेलेबेक भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्वीडिश अकादमी आधिकारिक तौर पर संभावित उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं करती।
कैसे चुना जाता है साहित्य का नोबेल विजेता?
साहित्य नोबेल के लिए हर साल अलग-अलग क्षेत्रों से नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। स्वीडिश अकादमी के सदस्य, साहित्य एवं भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों से जुड़े लोग संभावित लेखकों के नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। लेखक खुद अपना नाम नामांकित नहीं कर सकता।
नोबेल कमेटी शुरुआती चरण में करीब 15 से 20 नामों पर विचार करती है। इसके बाद मई तक सूची को घटाकर लगभग पांच उम्मीदवारों तक सीमित किया जाता है। अंतिम फैसला स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्यों की वोटिंग से होता है।
50 साल तक छिपी रहती है नामांकन की जानकारी
साहित्य नोबेल के नामांकन से जुड़ी जानकारी तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाती। स्वीडिश अकादमी नामांकित लेखकों की पूरी सूची को 50 साल तक गोपनीय रखती है। इसका मतलब है कि 2026 के नामांकन से संबंधित आधिकारिक जानकारी करीब वर्ष 2076 में सामने आएगी।
भारत के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार अलग-अलग वर्षों में नोबेल साहित्य पुरस्कार के लिए नामांकित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आरके नारायण जैसे नाम शामिल हैं।
दिसंबर में होगा पुरस्कार समारोह
साहित्य नोबेल के विजेता को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। विजेता को नोबेल मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। इस साल पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर, यानी लगभग 11.5 करोड़ रुपये बताई गई है।
अब सबकी नजरें शाम 4:30 बजे होने वाली घोषणा पर हैं। देखना होगा कि इस बार साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान किस लेखक या लेखिका के नाम जाता है।