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Nobel Prize 2026: अर्थशास्त्र के नोबेल की दौड़ में भारतीय मूल के राज चेट्टी, जानें 6 अन्य संभावित दावेदारों के नाम,आज होगा नाम का फैसला 

 

साल 2026 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार को लेकर चर्चा तेज है। संभावित दावेदारों में भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी का नाम भी शामिल है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कार्यरत राज चेट्टी ने अपनी रिसर्च के जरिए यह समझने में मदद की है कि किसी व्यक्ति की आर्थिक तरक्की के अवसर किन परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

उनके शोध में सरकारी आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन किया गया है कि अलग-अलग शहरों और सामाजिक परिस्थितियों में पले-बढ़े बच्चों को आगे चलकर बेहतर नौकरी, अधिक कमाई और आर्थिक सफलता हासिल करने के कितने अवसर मिलते हैं। इसके अलावा कंपनियों के विलय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोजगार और आर्थिक असमानता पर काम करने वाले कई अर्थशास्त्रियों के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में हैं।

1. राज चेट्टी: आर्थिक तरक्की के अवसरों पर शोध

भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी का काम इस बात पर केंद्रित रहा है कि किसी व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि उसके भविष्य को किस तरह प्रभावित करती है। उन्होंने बड़े सरकारी डेटासेट का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की है कि कुछ क्षेत्रों में गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर क्यों मिलते हैं, जबकि दूसरे क्षेत्रों में उनके लिए तरक्की करना मुश्किल होता है।

उनकी रिसर्च से शिक्षा, रोजगार, सामाजिक गतिशीलता और सरकारी नीतियों के प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। यह शोध नीति निर्माताओं को ऐसे कदम उठाने में भी मदद कर सकता है, जिनसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए अवसर बढ़ाए जा सकें।

2. एरियल पेक्स: कंपनियों के विलय और बाजार में प्रतिस्पर्धा पर शोध

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एरियल पेक्स का काम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और उनके विलय से बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों से जुड़ा है। इस तरह की रिसर्च से यह समझने में मदद मिलती है कि दो बड़ी कंपनियों के एक होने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।

उनका शोध बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने से जुड़े फैसलों के लिए उपयोगी है। कंपनियों के विलय की मंजूरी देते समय सरकार और नियामक संस्थाएं ऐसे आर्थिक विश्लेषणों का इस्तेमाल कर सकती हैं।

3. सुसान एथी: AI और मशीन लर्निंग का अर्थशास्त्र में इस्तेमाल

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सुसान एथी ने अर्थशास्त्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण काम किया है। इन तकनीकों के जरिए बड़े पैमाने पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, किसी रोजगार प्रशिक्षण योजना से लोगों की कमाई कितनी बढ़ी या उसका सबसे अधिक लाभ किन लोगों को मिला, इसका अध्ययन किया जा सकता है। सुसान एथी को 2007 में जॉन बेट्स क्लार्क मेडल भी मिला था, जो युवा अर्थशास्त्रियों के उल्लेखनीय शोध के लिए दिया जाता है।

4. रॉबर्ट बैरो: टैक्स, सरकारी कर्ज और बचत का संबंध

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री रॉबर्ट बैरो ने आर्थिक विकास, सरकारी कर्ज और कर व्यवस्था जैसे विषयों पर शोध किया है। उनका नाम ‘रिकार्डियन इक्विवेलेंस’ से जुड़े अध्ययन के कारण भी जाना जाता है।

इस विचार के अनुसार, यदि सरकार कर्ज लेकर टैक्स कम करती है, तो कुछ परिस्थितियों में लोग भविष्य में टैक्स बढ़ने की आशंका से अतिरिक्त आय खर्च करने के बजाय बचा सकते हैं। हालांकि, इस सिद्धांत की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर अर्थशास्त्रियों के बीच बहस जारी रही है।

5. थॉमस पिकेटी और इमैनुएल साएज: आर्थिक असमानता पर शोध

थॉमस पिकेटी और इमैनुएल साएज ने समाज में आय और संपत्ति के वितरण पर महत्वपूर्ण शोध किया है। उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि कुल आय का कितना हिस्सा सबसे अमीर लोगों के पास जाता है और समय के साथ आर्थिक असमानता किस तरह बदलती है।

उनकी रिसर्च ने टैक्स व्यवस्था, संपत्ति के वितरण और अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर पर दुनिया भर में चर्चा को प्रभावित किया है। आर्थिक नीतियों के जरिए असमानता कम करने की संभावनाओं का अध्ययन करने में भी यह शोध उपयोगी है।

6. डेविड ऑटोर: तकनीक और विदेशी व्यापार का नौकरियों पर असर

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के अर्थशास्त्री डेविड ऑटोर ने तकनीकी बदलाव, ऑटोमेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है।

चीन के साथ बढ़ते व्यापार पर उनकी रिसर्च से यह समझने में मदद मिली कि सस्ते आयात का कुछ उद्योगों और स्थानीय कामगारों पर क्या असर पड़ सकता है। आज AI और ऑटोमेशन के कारण नौकरियों में हो रहे बदलावों को समझने के लिए भी उनका काम महत्वपूर्ण माना जाता है।

7. जेनेट करी: बच्चों की सेहत और भविष्य की कमाई का संबंध

येल यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री जेनेट करी ने बच्चों के स्वास्थ्य, गरीबी और उनके भविष्य के आर्थिक अवसरों के बीच संबंधों पर शोध किया है। उनकी रिसर्च इस बात पर ध्यान देती है कि बचपन में खराब स्वास्थ्य, प्रदूषण और प्रतिकूल सामाजिक परिस्थितियों का असर वयस्क होने के बाद भी बना रह सकता है।

उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और उचित देखभाल उपलब्ध कराना उनके भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

अर्थशास्त्र का नोबेल बाकी पुरस्कारों से अलग क्यों है?

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत में शामिल नहीं था। इसकी शुरुआत 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक Sveriges Riksbank ने की थी। इसका आधिकारिक नाम ‘अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार’ है।

यह पुरस्कार ऐसे शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनका काम अर्थव्यवस्था को समझने या आर्थिक फैसले लेने के तरीकों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। विजेता के चयन में शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और उसके व्यापक प्रभाव को महत्व दिया जाता है।

हालांकि, संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पुरस्कार मिलना तय है। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के विजेता की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।