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Nobel Peace Prize 2026: आज होगा नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान, डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई नामों पर चर्चा
 

 

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता के नाम का ऐलान आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में किया जाएगा। इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर भी काफी चर्चा है। ट्रम्प लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उन्होंने दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण काम किए हैं और उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। हालांकि, पुरस्कार की घोषणा होने तक किसी भी नाम को विजेता नहीं माना जा सकता।
2019 में शुरू हुई थी ट्रम्प के नोबेल की चर्चा
डोनाल्ड ट्रम्प के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा 2019 में तेज हुई थी। उस समय उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ बातचीत की थी। ट्रम्प के समर्थकों ने इस पहल को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम बताया था।
जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी कथित तौर पर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था। इसके बाद से ट्रम्प कई मौकों पर पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
2025 में मारिया कोरीना मचाडो को मिला था पुरस्कार
साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को दिया गया था। मचाडो ने बाद में अपना नोबेल मेडल डोनाल्ड ट्रम्प को सौंपा था। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के समर्थन में ट्रम्प की भूमिका के प्रति सम्मान के तौर पर पेश किया।
ट्रम्प ने पिछले साल भी कई संघर्षों को रुकवाने का दावा करते हुए नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी जताई थी। हालांकि, पुरस्कार देने का फैसला स्वतंत्र नोबेल समिति करती है।
कनाडा के प्रधानमंत्री और पोप लियो XIV का भी जिक्र
इस बार चर्चा में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और पोप लियो XIV के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रतीक के रूप में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है।
हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था का नाम संभावित दावेदार के तौर पर सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि उसे आधिकारिक रूप से विजेता घोषित कर दिया गया है।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्यों है खास?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में स्थित है। यहां अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्री मिलकर वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं। अमेरिका, रूस, कनाडा और यूरोपीय देशों समेत कई अंतरराष्ट्रीय साझेदार इस परियोजना से जुड़े हैं।
पृथ्वी पर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों का साझा काम अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण माना जाता है। इसी वजह से ISS का नाम शांति और सहयोग से जुड़ी चर्चाओं में सामने आया है।
सूडान के राहत नेटवर्क की भूमिका भी अहम
सूडान में 2023 में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद स्थानीय नागरिकों के समूहों ने जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (ERR) नाम से जाने जाने वाले इन नेटवर्कों ने सामुदायिक रसोई, क्लिनिक और अन्य सहायता सेवाएं संचालित कीं।
विदेशी राहतकर्मियों की मौजूदगी कम होने के बीच स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर राहत कार्य जारी रखे। विदेश में रह रहे सूडानी नागरिकों ने भी आर्थिक मदद पहुंचाई। ऐसे प्रयासों को मानवीय सहायता और सामुदायिक एकजुटता के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
नोबेल शांति पुरस्कार ओस्लो में ही क्यों दिया जाता है?
नोबेल के अधिकांश पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति पुरस्कार की घोषणा और समारोह नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से जुड़े हैं। इसकी वजह अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत है।
1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने शांति पुरस्कार के विजेता का चयन नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त समिति को सौंपा था। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाएं थीं।
1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन शांति पुरस्कार चुनने की जिम्मेदारी नॉर्वे के पास ही रही। वर्ष 1901 से नोबेल पुरस्कार दिए जाने शुरू हुए। आज भी भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और अर्थशास्त्र के पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, जबकि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे में प्रदान किया जाता है।
अब सभी की नजर 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा पर है। विजेता का नाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस साल यह सम्मान किसे दिया गया है।