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New Zealand Election: लक्सन या हिपकिंस, किसके हाथ आएगी सत्ता? महंगाई से लेकर इमिग्रेशन तक ये हैं बड़े मुद्दे

 

न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के सामने सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। उनकी सेंटर-राइट नेशनल पार्टी का मुकाबला विपक्षी लेबर पार्टी से है, जिसका नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस कर रहे हैं। चुनाव में बढ़ती महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बिजली और किराने की कीमतों के साथ इमिग्रेशन जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच चर्चा में हैं।

दोनों प्रमुख दलों के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में छोटी पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और उनके समर्थन से ही अगली सरकार का गठन तय हो सकता है।

लक्सन के सामने सत्ता बचाने की चुनौती

क्रिस्टोफर लक्सन 2023 में नेशनल पार्टी को जीत दिलाकर प्रधानमंत्री बने थे। उनकी जीत के साथ लेबर पार्टी की करीब छह साल लंबी सरकार खत्म हुई थी। हालांकि सत्ता में आने के बाद लक्सन को अपनी ही पार्टी के भीतर से चुनौती का सामना करना पड़ा।

इस साल अप्रैल और अगस्त में पार्टी के सांसदों की ओर से उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए गए। दोनों मौकों पर लक्सन अपनी स्थिति बचाने में सफल रहे। उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार और गठबंधन में शामिल दलों के बीच मतभेदों को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

हिपकिंस की सत्ता में वापसी की कोशिश

लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस एक बार फिर प्रधानमंत्री पद हासिल करने की कोशिश में हैं। जनवरी 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, लेकिन अक्टूबर 2023 के चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

इस बार लेबर पार्टी महंगाई से राहत, बेहतर सरकारी सेवाओं और लोगों के घरेलू खर्च को कम करने पर जोर दे रही है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा

चुनाव में अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतें सबसे अहम मुद्दों में शामिल हैं। नेशनल पार्टी सरकारी खर्च पर नियंत्रण और बजट को मजबूत करने की बात कर रही है। वहीं लेबर पार्टी स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, रोजगार और आवास पर अधिक निवेश का वादा कर रही है।

बिजली और किराने के सामान की कीमतें भी चुनावी बहस का हिस्सा बनी हुई हैं। ग्रीन पार्टी और न्यूजीलैंड फर्स्ट जैसी छोटी पार्टियां इन क्षेत्रों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रख रही हैं।

इमिग्रेशन और वोटिंग नियमों पर भी बहस

इमिग्रेशन को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। ACT पार्टी गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए विदेशियों को देश से बाहर भेजने के पक्ष में है। वहीं न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी मतदान के अधिकार को केवल नागरिकों तक सीमित करने का प्रस्ताव रख रही है।

नतीजों के लिए करना होगा इंतजार

मतदान खत्म होने के बाद चुनाव आयोग शुरुआती नतीजे जारी करना शुरू करेगा। चुनाव की रात तक अधिकांश मतदान केंद्रों के शुरुआती परिणाम सामने आने की उम्मीद है, जबकि अंतिम नतीजों में विदेशों से आए वोट भी शामिल होंगे।

न्यूजीलैंड में हर तीन साल में आम चुनाव होते हैं और यहां मिक्स्ड मेंबर प्रपोर्शनल (MMP) प्रणाली लागू है। मतदाता उम्मीदवार और राजनीतिक पार्टी के लिए अलग-अलग वोट डालते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को संसद में बहुमत हासिल करना होता है। ऐसे में इस चुनाव में छोटी पार्टियों का समर्थन अगली सरकार की तस्वीर तय करने में अहम साबित हो सकता है।