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अमेरिका-ईरान रिश्तों में नया मोड़, वीडियो में जाने शांति समझौते के लिए अमेरिका ने रखीं 5 कड़ी शर्तें

 

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंधों को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पांच बड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन सकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि हालिया बमबारी और सैन्य कार्रवाइयों से ईरान को हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। यह शर्त ईरान के लिए सबसे संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि तेहरान लगातार सैन्य हमलों से हुए आर्थिक और बुनियादी ढांचे के नुकसान की भरपाई की मांग करता रहा है।

इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मांग सीधे तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अमेरिका और पश्चिमी देशों को लंबे समय से आशंका रही है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए कर सकता है, हालांकि ईरान हमेशा इन आरोपों से इनकार करता आया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान में केवल एक परमाणु केंद्र ही सक्रिय रखा जाए। यानी बाकी परमाणु सुविधाओं को बंद या सीमित किया जाए। यदि यह शर्त लागू होती है तो ईरान की परमाणु क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यह मांग अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह ईरान की परमाणु गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण चाहता है।

अमेरिका की एक और अहम शर्त ईरान की विदेशी संपत्तियों से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों में से 25 प्रतिशत से ज्यादा रकम जारी करने के पक्ष में नहीं है। गौरतलब है कि विभिन्न प्रतिबंधों के कारण ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियां विदेशों में फंसी हुई हैं। ईरान लंबे समय से इन संपत्तियों को मुक्त कराने की कोशिश कर रहा है ताकि उसकी आर्थिक स्थिति को राहत मिल सके।

इन शर्तों के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो मध्य पूर्व में स्थिरता की नई उम्मीद पैदा हो सकती है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका की कड़ी शर्तों को स्वीकार करना ईरान के लिए आसान नहीं होगा।

फिलहाल अमेरिका की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं ईरान की ओर से भी इन शर्तों पर औपचारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश वर्षों पुराने तनाव को खत्म कर किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे या फिर यह विवाद और गहराएगा।