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इजराइल में नया सियासी मोड़: 6 पार्टियों के समर्थन से गडी आइजनकोट बनेंगे अगले प्रधानमंत्री, कल हो सकता है आधिकारिक ऐलान

 

इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराता जा रहा है और विपक्षी नेता गडी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) अगली सरकार बनाने की दौड़ में आगे निकल गए हैं। हाल ही में हुए चुनाव के बाद इजराइल की संसद के 120 सदस्यों में से 67 सांसदों ने आइजनकोट को अगली सरकार बनाने का मौका देने का समर्थन किया है। वहीं, नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन मिला है, जबकि 7 सांसदों ने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में सिफारिश नहीं की।

इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने संकेत दिया है कि वह रविवार, 8 नवंबर को सरकार बनाने का जिम्मा किस नेता को सौंपा जाएगा, इसका ऐलान कर सकते हैं। ऐसे में आइजनकोट को नेतन्याहू की जगह अगली सरकार बनाने का पहला मौका मिलने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि वह प्रधानमंत्री बन ही गए हैं। उन्हें पहले संसद में बहुमत जुटाकर सरकार बनानी होगी।

6 पार्टियों ने किया आइजनकोट का समर्थन

चुनाव के बाद इजराइल की राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है। आइजनकोट के समर्थन में छह पार्टियां सामने आई हैं। इनमें चार यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियां और दो अरब नेतृत्व वाली पार्टियां शामिल हैं।

अरब गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने भी आइजनकोट को सरकार बनाने का मौका देने का समर्थन किया है। इस गठबंधन को 11 सीटें मिली हैं, जबकि दूसरी अरब पार्टी रा'आम के पास 8 सीटें हैं। दोनों दलों के समर्थन के बाद आइजनकोट के पक्ष में सांसदों की सिफारिशों की संख्या बढ़कर 67 हो गई।

यह आंकड़ा संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सदस्यों से अधिक है। हालांकि, राष्ट्रपति के सामने समर्थन की सिफारिश मिलना और वास्तव में सरकार बनाने के लिए गठबंधन तैयार करना दो अलग-अलग बातें हैं।

नेतन्याहू को लगा बड़ा झटका, सहयोगी दल ने भी नहीं दिया समर्थन

बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह चुनावी नतीजे बड़ा राजनीतिक झटका माने जा रहे हैं। उनकी अगुवाई वाले गठबंधन को संसद में 53 सीटें मिली हैं, लेकिन राष्ट्रपति के सामने उन्हें समर्थन देने वाले सांसदों की संख्या 46 रही।

सबसे अहम बात यह है कि नेतन्याहू के पुराने सहयोगी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म ने इस बार न तो नेतन्याहू और न ही आइजनकोट के पक्ष में सिफारिश की। इस फैसले से नेतन्याहू की स्थिति और कमजोर होती दिखाई दे रही है।

इस दल और नेतन्याहू के बीच अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दे पर मतभेद बताए जा रहे हैं। इजराइल में सैन्य सेवा का सवाल सरकार गठन की बातचीत में भी अहम मुद्दा बना हुआ है।

आइजनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

भले ही आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला हो, लेकिन उनके लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह उनके संभावित सहयोगी दलों के बीच मतभेद हैं।

आइजनकोट के समर्थन में आई अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर विपक्षी गठबंधन के कुछ दलों ने आपत्ति जताई है। यिसराइल बेतेनु पार्टी के नेता एविग्डोर लिबरमैन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह अरब पार्टियों पर निर्भर सरकार का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं हैं।

हालांकि, लिबरमैन ने अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों के साथ समझौते की संभावना को लेकर नरम रुख दिखाया है। ऐसे में आइजनकोट को सभी सहयोगी दलों के बीच सहमति बनानी होगी, ताकि संसद में जरूरी बहुमत हासिल किया जा सके।

सरकार बनाने के लिए मिलेंगे 28 दिन

इजराइल में राष्ट्रपति जिस नेता को सरकार बनाने का जिम्मा सौंपेंगे, उसे गठबंधन तैयार करने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर उसे 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है।

अगर आइजनकोट इस समय सीमा में सरकार बनाने में सफल रहते हैं, तो बेंजामिन नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। वहीं, अगर वह बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं, तो आगे किसी दूसरे नेता को मौका मिल सकता है या देश में दोबारा चुनाव कराने की स्थिति बन सकती है।