इजराइल में सत्ता बचाने के लिए नेतन्याहू ने चली नई चाल, वीडियो में जाने विपक्षी नेता के साथ सरकार बनाने को तैयार; अरब पार्टियों के समर्थन से बढ़ी चुनौती
इजराइल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। इजराइली मीडिया i24 न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज नहीं किया है। माना जा रहा है कि नेतन्याहू को चिंता है कि अगर विपक्षी नेता अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बनाने में सफल हो गए तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है।
हालांकि, नेतन्याहू की ओर से गठबंधन की संभावना जताए जाने के बावजूद गादी आइजेनकोट ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में इजराइल में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों नेता साथ मिलकर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर विपक्षी गठबंधन का रास्ता अपनाते हैं।
अरब पार्टियों के समर्थन से आइजेनकोट मजबूत
दरअसल, इजराइल की जॉइंट लिस्ट और राअम जैसी अरब पार्टियों ने रविवार को विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को समर्थन देने का ऐलान किया था। इस समर्थन के बाद आइजेनकोट के पास 67 सांसदों का समर्थन जुटने की संभावना जताई जा रही है।
अगर यह समर्थन वास्तविक गठबंधन में बदलता है तो आइजेनकोट के लिए सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। यही स्थिति नेतन्याहू के लिए चुनौती बन सकती है। बताया जा रहा है कि इसी राजनीतिक समीकरण को देखते हुए नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना खुली रखी है।
इजराइल में बहुमत के लिए चाहिए 61 सीटें
इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक गठबंधन के बहुमत तक नहीं पहुंचने से सरकार गठन को लेकर स्थिति उलझ गई है। ऐसे में अलग-अलग दलों के बीच समर्थन जुटाने और गठबंधन बनाने की कोशिशें जारी हैं।
नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
नेतन्याहू लंबे समय से इजराइल की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन मौजूदा चुनावी नतीजों के बाद उनके सामने सरकार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। विपक्षी दलों के बीच संभावित एकजुटता और अरब पार्टियों के समर्थन ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
i24 न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू को आशंका है कि गादी आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बनाने में सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में नेतन्याहू को सत्ता से बाहर होना पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की नजरें गादी आइजेनकोट के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर वे नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करते और अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करने में सफल रहते हैं, तो इजराइल में नई सरकार का रास्ता खुल सकता है। वहीं, दोनों नेताओं के बीच समझौता होने पर देश का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।