नेपाल बाढ़ त्रासदी: अज्ञात शवों को जलाने की जगह किया जा रहा दफन, फुटेज में देंखे DNA जांच से होगी पहचान
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद भयावह बने हुए हैं। हजारों लोगों के लापता होने और बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ीहो गई है। अब नेपाल में सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में DNA जांच के जरिए उनकी पहचान की जा सके और शवों को उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके।बाढ़ के पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने के कारण कई शवों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ने लगे हैं। ऐसे में उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन का कहना है कि अगर इन शवों को जला दिया गया तो पहचान की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसी वजह से इन्हें सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक कब्रों में दफनाने का फैसला लिया गया है।
शवगृहों में बढ़ा दबाव, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। लेकिन शवों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय शवगृह और अस्थायी संरक्षण केंद्र भर चुके हैं। सीमित संसाधनों के कारण प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है।इसी स्थिति को देखते हुए अज्ञात शवों को सामूहिक रूप से दफनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शवों के नमूने और जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि भविष्य में DNA परीक्षण के माध्यम से मृतकों की पहचान की जा सके।
मौत का आंकड़ा 1066 के पार, 4400 से ज्यादा लोग लापता
इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1066 पहुंच गया है। इनमें नेपाल में 1050 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 4400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। लेकिन कई इलाकों में भारी मात्रा में जमा मलबा, कीचड़ और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
परिवारों को अब भी अपनों का इंतजार
बाढ़ में अपने परिवार के सदस्यों को खो चुके लोग अब भी उनके लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई परिवार प्रशासन से अपने लापता परिजनों की जानकारी मांग रहे हैं। अज्ञात शवों को दफनाने का फैसला इसी उम्मीद के साथ लिया गया है कि वैज्ञानिक जांच के जरिए उनकी पहचान हो सके और परिवारों को अंतिम संस्कार का अधिकार मिल सके।नेपाल सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं। भारत और अन्य देशों की राहत टीमें भी बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। हालांकि, हजारों लोगों के लापता होने के कारण यह त्रासदी नेपाल के लिए बड़ी मानवीय चुनौती बनी हुई है।विशेषज्ञों के अनुसार, DNA जांच के जरिए शवों की पहचान में समय लग सकता है, लेकिन यह उन परिवारों के लिए एकमात्र उम्मीद है जो अब भी अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि हर शव का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी पहचान प्रक्रिया में परेशानी न हो।