Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से 626 मौतें, क्या चीन छिपा रहा है जलप्रलय से जुड़े आंकड़े और असल वजह?
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और ग्लेशियर फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 626 लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई गांव, कस्बे और शहर मलबे में तब्दील हो चुके हैं। राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच नेपाल की त्रासदी को लेकर चीन की भूमिका और वहां की मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठने लगे हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की सरकारी मीडिया ने तिब्बत और प्रभावित इलाकों में हुई तबाही के मानवीय पहलू को अपेक्षाकृत कम जगह दी और रिपोर्टिंग में राहत एवं बचाव अभियानों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया।
चीनी मीडिया की कवरेज पर उठे सवाल
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल और चीन के प्रभावित इलाकों पर दुनियाभर की नजरें हैं, लेकिन चीन के हिस्से में हुई तबाही से जुड़ी जानकारी काफी सीमित तौर पर सामने आई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी सरकारी मीडिया ने प्रभावित इलाकों से रिपोर्टिंग तो की, लेकिन वहां के पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय बचाव अभियान और सरकारी प्रयासों को ज्यादा प्रमुखता दी गई।
एक रिपोर्ट के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा गया कि तिब्बत के प्रभावित क्षेत्र से ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पत्रकार ने स्थानीय लोगों से बातचीत नहीं की। इससे चीन में सूचना और मीडिया कवरेज को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
नेपाल में 626 मौतें, चीन में 5 का आंकड़ा
नेपाल में इस आपदा से अब तक 626 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं चीन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में मृतकों की संख्या फिलहाल 5 बताई गई है।
हालांकि, ग्यिरोंग सीमा चौकी के आसपास कई गांव और आबादी वाले क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे में वहां नुकसान और हताहतों के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर कुछ लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, चीन में वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसे लेकर स्वतंत्र रूप से पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
समय पर अलर्ट नहीं मिलने का भी दावा
नेपाल के पूर्व पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने भी आपदा से पहले चेतावनी को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 26 अगस्त की विनाशकारी ग्लेशियर बाढ़ से पहले चीन की ओर से समय पर पर्याप्त अलर्ट नहीं मिला।
उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रभावी चेतावनी मिल जाती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
डिफेंस एक्सपर्ट ने भी चीन की भूमिका पर उठाए सवाल
भारत में रिटायर्ड मेजर जनरल और डिफेंस एक्सपर्ट पी.के. सहगल ने भी नेपाल में हुई तबाही को लेकर चीन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
उनके मुताबिक, अगर चीन की ओर से समय पर और स्पष्ट शुरुआती चेतावनी जारी की जाती, तो नेपाल में हुए नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
हालांकि, इस आपदा के लिए सीधे तौर पर चीन को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों को लेकर स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है।
निर्माण परियोजनाओं को लेकर भी उठे सवाल
पी.के. सहगल ने चीन में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी चिंता जताई। उनका दावा है कि तिब्बत जैसे संवेदनशील और पर्यावरणीय रूप से नाजुक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निर्माण गतिविधियों का असर स्थानीय पर्यावरण पर पड़ सकता है।
उन्होंने बांध, सुरंग, सड़क और नदियों के रास्ते से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों में निर्माण को लेकर पहले भी पर्यावरणीय चिंताएं जताई जाती रही हैं।
आपदा के बीच बढ़ रही जवाबदेही की मांग
नेपाल में भारी तबाही के बाद अब राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ आपदा की वजहों और समय पर चेतावनी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर सीमावर्ती और ग्लेशियर प्रभावित इलाकों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली कितनी प्रभावी थी, इसकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल नेपाल में बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक टीमें पहुंच रही हैं, आपदा से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।