☰
×

Marco Rubio on Pakistan: अमेरिका ने पाकिस्तान से बातचीत को बताया जरूरी, भारत की सुरक्षा चिंताओं का भी किया जिक्र

 

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका को उसके साथ बातचीत जारी रखनी पड़ती है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने स्पष्ट किया कि विदेश नीति में कई बार ऐसे देशों के साथ भी संवाद बनाए रखना जरूरी होता है, जिनके साथ मतभेद हों।

रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ अपने संबंध बनाए रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अलग-अलग देशों के साथ संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन कूटनीति के लिए यह आवश्यक है।

पाकिस्तान से बातचीत भारत की चिंताओं को दूर करने में मददगार: रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वाली गतिविधियों के खिलाफ है। उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को ऐसी गतिविधियों को हतोत्साहित करने का अवसर मिल सकता है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंताएं होती हैं।

रुबियो के अनुसार, देशों के साथ बातचीत बनाए रखना हमेशा आसान फैसला नहीं होता, लेकिन इससे समस्याओं को सुलझाने और संभावित खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ संबंधों को इसी कूटनीतिक नजरिए से देखने की बात कही।

ईरान के नेतृत्व पर रुबियो ने उठाए सवाल

इंटरव्यू के दौरान रुबियो ने ईरान की सरकार और उसके नेतृत्व की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है, क्योंकि उनके मुताबिक वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का प्रभाव है।

रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सभी शिया धर्मगुरुओं के लिए नहीं, बल्कि उन कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं के लिए है, जिनकी विचारधारा के कारण बातचीत और समझौते की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई पर अलग-अलग दावे

रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही का जिक्र करते हुए दावा किया कि सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के 80 से 100 प्रतिशत तक बनी हुई है। उन्होंने ईरान पर ऐसे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनका युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है।

हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए फैक्ट चेक के मुताबिक, स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के आंकड़ों में 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य स्तर से करीब 99 प्रतिशत कम बताई गई। दोनों दावों के बीच बड़ा अंतर है। ऐसे में वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए आंकड़ों की अवधि, उनके आधार और जहाजों की आवाजाही से जुड़े स्वतंत्र स्रोतों की पुष्टि जरूरी है।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों की निंदा करने की अपील

रुबियो ने कहा कि ईरान की ओर से किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है और जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान खतरे में पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इन हमलों से जहाजों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है और कई ड्रोन तथा मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया जाता है।

उन्होंने इन हमलों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों द्वारा व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने से की। रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होने और उनकी निंदा करने की अपील की।

भारतीय नाविकों की मौत पर भी जताई चिंता

अमेरिकी विदेश मंत्री ने समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों की मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह समुद्री व्यापार में भारतीय नाविकों की बड़ी भागीदारी भी है।

रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने को अपनी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानता है। साथ ही, उसने समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही पर किए गए अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण बनी हुई है।